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आशा कार्यकर्ताओं का अनोखा विरोध: सरकार की उदासीनता के खिलाफ बाल कटवा कर जताया आक्रोश

आशा कार्यकर्ताओं का अनोखा विरोध: सरकार की उदासीनता के खिलाफ बाल कटवा कर जताया आक्रोश

Last Updated Apr - 01 - 2025, 11:27 AM | Source : Fela News

आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार की उदासीनता के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बाल कटवाकर अपनी नाराजगी जाहिर की, यह कदम उनके संघर्ष और मांगों को उजागर करने
सरकार की उदासीनता के खिलाफ बाल कटवा कर जताया आक्रोश
सरकार की उदासीनता के खिलाफ बाल कटवा कर जताया आक्रोश

केरल में आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों की अनदेखी के खिलाफ एक अनोखे विरोध प्रदर्शन में बाल कटवा कर अपना आक्रोश व्यक्त किया है। यह प्रदर्शन तिरुवनंतपुरम स्थित सचिवालय के सामने 50 दिनों से चल रहे धरने के दौरान हुआ, जहां सैकड़ों महिलाओं ने सरकार की उदासीनता पर नाराजगी जताई।

विरोध प्रदर्शन का विवरण: सोमवार को, प्रदर्शन के 50वें दिन, आशा कार्यकर्ताओं ने अपने बाल काटकर सरकार की अनदेखी के खिलाफ विरोध जताया। कुछ महिलाओं ने अपने बाल आधे कटवाए, जबकि कुछ ने पूरी तरह से मुंडन करवा लिया। इस दौरान, उन्होंने कटे हुए बालों को ऊंचा उठाकर नारेबाजी की और अपनी भावनाओं को प्रकट किया। यह दृश्य उनकी निराशा और संघर्ष की गहराई को दर्शाता है। 

मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया: आशा कार्यकर्ता अपनी मासिक मानदेय को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने, सेवानिवृत्ति पर ₹5 लाख का लाभ देने और निश्चित कार्य घंटे निर्धारित करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि राज्य में लगभग 26,000 आशा कार्यकर्ताओं को कम से कम दो महीने का मानदेय और तीन महीने के प्रोत्साहन राशि का भुगतान अभी तक नहीं मिला है। 

सरकार की प्रतिक्रिया: सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी मानदेय वृद्धि व्यावहारिक नहीं है और यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आशा कार्यकर्ताओं की मांगों को पूरा करे। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के साथ दूसरी दौर की वार्ता में आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें अपमानित किया गया और अधिकारियों ने उनका मजाक उड़ाया। 

राजनीतिक समर्थन और विपक्ष की भूमिका: कांग्रेस पार्टी ने आशा कार्यकर्ताओं के विरोध का समर्थन किया है और कांग्रेस-शासित स्थानीय निकायों को उनके मानदेय में वृद्धि करने का निर्देश दिया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि स्थानीय निकायों द्वारा घोषित वेतन वृद्धि व्यावहारिक नहीं है और यह आशा कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास है। 

आशा कार्यकर्ताओं का यह अनोखा विरोध प्रदर्शन उनकी गहरी निराशा और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग को दर्शाता है। सरकार और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे इन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करें और उचित समाधान निकालें, ताकि वे समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा सकें।

 

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