Last Updated Mar - 07 - 2026, 12:16 PM | Source : Fela News
Varanasi News In Hindi: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत कर दी है। इस दौरान उन्होंने गौ रक्षा के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा और अपनी बात रखी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत कर दी है। वह पालकी में सवार होकर यात्रा पर निकले। यात्रा शुरू करते ही उन्होंने गौ रक्षा के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि अब गौ माता की रक्षा के लिए यह यात्रा जरूरी और मजबूरी बन गई है। अपने ही द्वारा चुनी गई सरकारों के सामने गौ माता को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोग इस यात्रा के अलग-अलग मायने निकालते हैं, लेकिन हम धार्मिक लोग हैं और गौ माता की रक्षा के लिए निकले हैं।
यात्रा की शुरुआत के बाद शंकराचार्य ने कहा कि चिंतामणि गणेश के दर्शन करने के बाद वह संकट मोचन मंदिर जाएंगे और गौ माता पर आए संकट को दूर करने के लिए प्रार्थना करेंगे। यात्रा को रोके जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर रोका जाएगा तो रुक जाएंगे, लेकिन सवाल यह है कि इसे रोका क्यों जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब लोगों को गौ रक्षा के लिए धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है। यह यात्रा भी उसी दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने सांसदों और विधायकों से इस यात्रा में शामिल होने की अपील की और जनता से भी गौ हत्या के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
यात्रा शुरू होने से पहले विद्यामठ के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात रहा। शंकराचार्य ने यात्रा शुरू करने से पहले गौ पूजन किया। शनिवार सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर वाराणसी से यात्रा की शुरुआत हुई, जो लखनऊ तक जाएगी।
यात्रा के पहले दिन वाराणसी से निकलकर जौनपुर, सुल्तानपुर, गौरीगंज और अमेठी होते हुए रायबरेली पहुंचा जाएगा, जहां रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है।
1. 7 मार्च 2026 को जौनपुर और सुल्तानपुर में सभाएं करते हुए रायबरेली में रात्रि विश्राम होगा।
2. 8 मार्च 2026 को मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज में सभाएं करते हुए उन्नाव में रात्रि विश्राम होगा।
3. 9 मार्च 2026 को बांगरमऊ और बघोली में सभाएं करते हुए नैमिषारण्य में रात्रि विश्राम होगा।
4. 10 मार्च 2026 को सिंधौली और इजौटा में सभाएं करते हुए लखनऊ पहुंचेंगे।
5. 11 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा।
यह भी पढ़े