Last Updated Apr - 09 - 2025, 02:17 PM | Source : Fela News
एक शहर, एक लड़की और 7 दिनों की खौफनाक कैद
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 19 साल की एक युवती के साथ 7 दिनों तक गैंगरेप किया गया, जिसमें कुल 23 आरोपियों के शामिल होने का आरोप है। यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
लापता होने से लेकर वापसी तक: 7 दिन का डरावना सफर
29 मार्च को लापता हुई लड़की, 4 अप्रैल को लौटी घर—फिर खोले दर्दनाक राज़।
पांडेपुर लालपुर की रहने वाली पीड़िता को उसका कथित बॉयफ्रेंड हुक्का बार ले गया, जहां से उसके साथ हैवानियत की शुरुआत हुई। पीड़िता के अनुसार, उसे नशा देकर कई होटलों और अलग-अलग ठिकानों पर ले जाया गया, जहां उसे बार-बार गैंगरेप का शिकार बनाया गया। वो भागने की कोशिश करती रही लेकिन हर बार उसे दोबारा पकड़ लिया गया।
एफआईआर में 23 आरोपियों के नाम, कई अब भी फरार
पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट, 6 आरोपियों को किया गिरफ्तार।
6 अप्रैल को पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। रिपोर्ट में राज विश्वकर्मा, समीर, आयुष, सोहेल, दानिश, अनमोल, साजिद, जहीर, इमरान, जाइब, अमन, राज खान जैसे नामों के साथ 11 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में जुटी, CCTV और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे
डीसीपी वरुणा ज़ोन चंद्रकांत मीणा ने मामले को बताया संवेदनशील।
वाराणसी पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। कई होटलों के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आरोपी कौन-कौन से लोकेशन पर गए, इसका ट्रैक तैयार किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक ये एक बेहद संवेदनशील मामला है और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा रही।
सवाल व्यवस्था पर भी: कैसे 7 दिन तक शहर में घूमते रहे आरोपी?
कई होटल, कई लोग, एक पीड़िता—फिर भी किसी को खबर तक नहीं?
इस मामले ने वाराणसी की लॉ एंड ऑर्डर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने दिनों तक लड़की कई होटलों में ले जाई गई, लेकिन न किसी स्टाफ को शक हुआ, न कोई रिपोर्ट हुई। ये लापरवाही एक बड़ी चूक को दर्शाती है, जिस पर अब जवाबदेही जरूरी है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, जवाबदेही भी ज़रूरी
एक लड़की की जिंदगी को 7 दिनों में नर्क बना देने वालों को सिर्फ सलाखों के पीछे डालना काफी नहीं।
ये केस केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम की कई परतें उधेड़ने वाला आईना है। क्या हुक्का बारों की मॉनिटरिंग हो रही है? क्या होटलों में विज़िटर एंट्रीज चेक की जाती हैं? क्या नाबालिग और युवतियों की सुरक्षा के लिए कोई प्रोटोकॉल है?
जवाब हमें ही ढूंढने हैं, और जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस या परिवार की नहीं, पूरे समाज की है।