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शिक्षकों पर बढ़ते दबाव की ये कड़वी हकीकत क्या बताएगी…गुजरात में SIR के बोझ तले एक और BLO की मौत…बढ़ा विरोध

शिक्षकों पर बढ़ते दबाव की ये कड़वी हकीकत क्या बताएगी…गुजरात में SIR के बोझ तले एक और BLO की मौत…बढ़ा विरोध

Last Updated Nov - 21 - 2025, 04:46 PM | Source : Fela News

गुजरात में SIR और BLO के दबाव से शिक्षक की मौत, कार्यभार घटाने की मांगों पर विरोध तेज।
शिक्षकों पर बढ़ते दबाव की ये कड़वी हकीकत क्या बताएगी…
शिक्षकों पर बढ़ते दबाव की ये कड़वी हकीकत क्या बताएगी…

गुजरात में शिक्षक समुदाय एक बार फिर सदमे में है। SIR यानी स्कूल इंस्पेक्शन रिपोर्ट और BLO की जिम्मेदारियों से जूझ रहे एक और शिक्षक ने जान दे दी। इस दर्दनाक घटना के साथ ऐसे मामलों की संख्या अब आठ तक पहुंच चुकी है। हर मौत के बाद सवाल वही खड़े हो रहे हैं—क्या सिस्टम का बोझ अब इंसानी हद से आगे निकल चुका है?

ताज़ा मामले में शिक्षक reportedly यही कहते सुने गए—“मुझसे अब SIR का काम नहीं होगा, तुम अपना…।” यह वाक्य सिर्फ एक व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की थकान को उजागर करता है। शिक्षकों का कहना है कि SIR के नाम पर घंटों तक डेटा भरना, लगातार निरीक्षण, बार-बार रिपोर्टिंग और BLO की अतिरिक्त जिम्मेदारियों ने उनका पूरा संतुलन बिगाड़ दिया है। पढ़ाने से ज्यादा वक्त कागजी काम पर जा रहा है, और दबाव इतना बढ़ चुका है कि कई शिक्षक मानसिक रूप से टूटने लगे हैं।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों के निर्देशों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। BLO के काम, जैसे मतदाता सूची अपडेट, घर-घर सर्वे, डेटा कलेक्शन, न सिर्फ समय लेते हैं, बल्कि स्कूल के नियमित काम को भी बाधित करते हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि स्कूल आती-जाती रिपोर्टिंग की वजह से वे सुबह से रात तक तनाव में रहते हैं।

इस घटना के बाद राज्यभर में शिक्षकों और यूनियनों ने विरोध तेज कर दिया है। उनकी मांग है कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ घटाया जाए और BLO ड्यूटी को वैकल्पिक बनाया जाए। उनका कहना है कि जब शिक्षक ही असुरक्षित और तनावग्रस्त होंगे, तो शिक्षा व्यवस्था कैसे बेहतर होगी?

सरकार ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, लेकिन संगठन इसे पर्याप्त नहीं मानते। वे कहते हैं कि समस्या प्रक्रियाओं और नीतियों में है, सिर्फ जांच से कुछ नहीं बदलेगा। वे यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

गुजरात में हुई यह ताज़ा मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस गहरी थकान और असंतोष की निशानी है जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है। जब शिक्षक ही सुरक्षित और संतुलित नहीं रहेंगे, तो शिक्षा का भविष्य कैसे सुरक्षित रह पाएगा, यही सवाल अब जोर पकड़ रहा है।

 

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