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गोवा की उस रात में क्या छिपा था

गोवा की उस रात में क्या छिपा था

Last Updated Dec - 08 - 2025, 05:23 PM | Source : Fela News

गोवा क्लब आग हादसे में 25 मौतें—लापरवाही, सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े।
गोवा की उस रात में क्या छिपा था
गोवा की उस रात में क्या छिपा था

एक हादसा जिसने 25 जिंदगियों को पलभर में खत्म कर दिया, पर सवाल अभी भी वही है कि इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हुई. गोवा की इस दर्दनाक घटना ने सिस्टम, मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर परतें खोल दी हैं.

गोवा के एक पॉपुलर क्लब में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर दिया. रात के समय चल रहे कार्यक्रम के बीच अचानक उठी लपटों ने कुछ ही मिनटों में अफरा-तफरी मचा दी. मौके पर मौजूद लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन क्लब का स्ट्रक्चर, तंग रास्ते और असुरक्षित निकास ने इस त्रासदी को और बढ़ा दिया. राहत टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू किया, लेकिन तब तक 25 लोग अपनी जान गंवा चुके थे.

जांच में जो बातें सामने आईं, उन्होंने स्थिति को और गंभीर बना दिया. पता चला कि क्लब के पास कई जरूरी परमिशन ही नहीं थीं. फायर NOC अधूरी थी, सुरक्षा व्यवस्था मानकों पर खरी नहीं उतरती थी और आपातकालीन गेट भी पर्याप्त नहीं थे. इतनी भीड़ वाली जगह में बेसिक सेफ्टी गाइडलाइंस तक का पालन न किया जाना सीधे-सीधे प्रबंधन की बड़ी चूक माना जा रहा है.

पुलिस ने क्लब के मैनेजर्स और जिम्मेदार अधिकारियों को हिरासत में लिया है. कोर्ट ने भी पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर भेज दिया है, ताकि यह साफ हो सके कि किन स्तरों पर लापरवाही हुई और कैसे यह क्लब बिना सही दस्तावेजों के चल रहा था. स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी गड़बड़ी होने के बावजूद वर्षों तक किसी ने कार्रवाई क्यों नहीं की.

हादसे के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि पूरे पर्यटन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच की जाए. गोवा हर साल लाखों सैलानियों को आकर्षित करता है, लेकिन इस घटना ने यह दिखा दिया कि सिर्फ मनोरंजन की सुविधाएं बढ़ाने से काम नहीं चलता, सुरक्षा को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा.

लोगों में गुस्सा और दुख दोनों है. जो परिवार अपने अपनों को खो चुके हैं, वे एक ही सवाल पूछ रहे हैं,अगर सुरक्षा ठीक होती, तो क्या इन 25 जिंदगियों को बचाया जा सकता था? हादसे की जांच जारी है, लेकिन यह घटना साफ संदेश देती है कि लापरवाही और गैरकानूनी संचालन की कीमत हमेशा आम लोगों को ही चुकानी पड़ती है.

 

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