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केरल में सियासत किस ओर मुड़ रही है

केरल में सियासत किस ओर मुड़ रही है

Last Updated Dec - 01 - 2025, 05:58 PM | Source : Fela News

केरल निकाय चुनाव 2026 विधानसभा से पहले बड़ा संकेत, LDF-UDF-NDA के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तेज।
केरल में सियासत किस ओर मुड़ रही है
केरल में सियासत किस ओर मुड़ रही है

इस बार के स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर माहौल अचानक गर्म हो गया है। वजह ये है कि इसे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां सभी दल अपनी ताकत परखने में जुट गए हैं।

केरल की राजनीति हमेशा से दो बड़े गठबंधनों, एलडीएफ और यूडीएफ, के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए तेजी से जमीन तलाश रहा है और मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है।

राज्य में एलडीएफ की सरकार दो कार्यकाल से सत्ता में है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अभी भी अपनी पकड़ मजबूत दिखाना चाहते हैं, खासकर ऐसे समय में जब विपक्ष लगातार उन पर शासन और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ भी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरा है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली बढ़त ने उनके उत्साह को और बढ़ाया है, इसलिए वे इसे बड़ा मौका मान रहे हैं।

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी की बढ़ती हलचल को लेकर है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने कई जिलों में अपना वोट शेयर बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व भी केरल पर खास ध्यान दे रहे हैं। एनडीए चाहती है कि इस चुनाव में वह तीसरे विकल्प की बजाय निर्णायक खिलाड़ी की भूमिका में नजर आए।

इन निकाय चुनावों की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि केरल में स्थानीय निकायों की राजनीतिक हवाएं अक्सर विधानसभा चुनाव के रुख का संकेत देती हैं। अगर किसी गठबंधन को यहां बड़ा फायदा मिलता है, तो उसे 2026 के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल जाएगी। इसी कारण सभी दल बेहद आक्रामक कैंपेन और रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।

मतदाताओं के बीच मुद्दे भी साफ नजर आ रहे हैं, महंगाई, रोजगार, बाढ़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और स्थानीय विकास। एलडीएफ अपने विकास कार्यों का हवाला दे रहा है, यूडीएफ सरकार पर असंतोष को भुनाने की कोशिश में है, जबकि एनडीए बदलाव का नैरेटिव आगे लेकर चल रहा है।

इस बार टक्कर सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि भविष्य की सियासी दिशा तय करने की है। यही वजह है कि इन स्थानीय निकाय चुनावों को केरल की राजनीति का ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है, जहां हर दल के लिए जीत सिर्फ जीत नहीं, बल्कि 2026 की तैयारी का सबसे बड़ा इशारा बन सकती है।

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