Last Updated Dec - 10 - 2025, 03:27 PM | Source : Fela News
सुप्रीम कोर्ट आज हल्द्वानी अतिक्रमण मामले पर बड़ा फैसला सुनाने वाला है। शहर में बेचैनी बढ़ गई है, लोग बारीकी से हर अपडेट पर नजर टिकाए हुए हैं। जहां एक तरफ प्रशा
हल्द्वानी का यह मामला वर्षों पुराने जमीन विवाद से जुड़ा है। रेलवे भूमि पर बसे हजारों परिवारों को हटाने की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। पिछले आदेशों के बाद जहां लोगों में बेघर हो जाने की चिंता थी, वहीं आज के फैसले से उम्मीदें भी जुड़ी हैं कि उनके भविष्य पर स्पष्ट दिशा मिलेगी। सुबह से ही इलाके में पुलिस फोर्स तैनात है ताकि किसी भी तरह की अफरातफरी की स्थिति न बने।
जमीन पर रहने वाले लोगों का कहना है कि वे कई दशकों से यहां रहते आए हैं और अचानक से यह निर्णय उनके पूरे जीवन को हिला सकता है। कई लोग तो यह कहते भी नजर आए कि “हमारी गलती क्या है, अगर हटाना ही है तो जिंदा मार डालो।” इन शब्दों में छिपी बेचैनी साफ बताती है कि फैसला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी का है। दूसरी तरफ सरकार और विभागों की दलील है कि जमीन सरकारी है और अतिक्रमण हटाना जरूरी है।
फैसले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर पहले समाधान क्यों नहीं निकाला गया। वहीं सरकार का कहना है कि अदालत जो भी निर्णय देगी, उसी के मुताबिक कार्रवाई होगी और किसी को भी न्याय से वंचित नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में अब बस कुछ ही वक्त बाकी है। हल्द्वानी में सड़कें शांत हैं, बाजार धीमे हैं और घरों में चिंता का माहौल है। लोग टीवी चैनलों, मोबाइल नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया पर लगातार नजरें गड़ाए बैठे हैं, क्योंकि अगला आदेश ही तय करेगा कि इन परिवारों के सिर पर छत रहेगी या नहीं।
हल्द्वानी में आज का दिन सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि हजारों लोगों की उम्मीदों और डर के बीच खड़ा सबसे बड़ा इम्तिहान बन गया है।