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हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कौन? धामी का सीधा और स्पष्ट जवाब

हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कौन? धामी का सीधा और स्पष्ट जवाब

Last Updated Feb - 25 - 2026, 05:54 PM | Source : Fela news

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदुत्व के पोस्टा बाँय को लेकर किए सवाल का सीधा जवाब दिया और राजनीतिक संदर्भ में अपने विचार स्थथा किए।
हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कौन?
हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कौन?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सवाल का सीधा जवाब दिया, जिसने राजनीतिक गलियरी में चधी का विषय बन गया है। जब उनसे पूछा गया कि हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कौन है?', तो उन्होंने स्पष्ट सब्दी में जवाब देते हुए अपने विचार साझा किए। इस बयान ने न केवल पार्टी समर्थकों का ध्यान थीचा है बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों के बीच श्री बहस छेड़ दी है।

धामी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हिंदूत्व एक भावनात्मक, सांस्कृतिक और सामाजिक विचारधारा है, जिसे किसी एक व्यक्ति में सिमटकर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, हिंदुत्व की असली पहचान हमारे संस्कृतियों, रीति-रिवाजों और एकला में निहित है, न कि किसी पोस्टर बॉय के रूप में किसी एक नेता से। यह उत्तर विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अक्सर राजनीतिक दक्षाओं में हिंदुत्व को राजनीतिक पहचान और चुनावी रणनीति के रूप में लिया जाता रहा है।

सीएम धामी ने कहा कि अगर हिंदुत्व को सही अर्थ में समझा जाप तो वह धर्म, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सद्‌भाव से जुड़ा हुआ है। यह केवल किसी एक व्यक्ति का प्रतीक नहीं है, ब प्रतीक नहीं है, बल्कि वह मूल्य हैं जो भारतीय समाज की एक सूत्र में पिरोते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजपा और उसके सहयोगी दलों की की अधिकांश नीतियों इसी विचारधारा से प्रभावित है, जिसका लक्ष्य एकजुटता, सम्मान और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।

उनके उत्तर में यह भी साफ झलकता है कि यह किसी व्यक्तिगत चमक-दमक या प्रचार के लिए हिंदुत्व को एक व्यक्ति की उति में बदलने के पक्ष में नहीं है। धामी का मानना है कि हिंदुत्व की व्याख्या और व्यवहार को सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में समझना चाहिए न कि केवल राजनीतिक रूप में। उन्होंने कहा, "मैं मानता हूँ कि हिंदुत्व वह विधार है जो हमारे समाज को जोड़ता है, हमारी सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करता है।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री धामी ने यह उत्तर उस समय दिया है जब भारत की राजनीति में हिंदुत्व को लेकर बहसे तेज हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह विषय चुनावी रणनीति, सामाजिक पहचान और सार्वजनिक संवाद का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है। ऐसे में किसी राजनीतिक नेता ‌द्वारा दिए गए जटिल और स्पष्ट जवाबी से माहीन और भी गर्म हो सकता है।

धामी के बयान ने यह भी संकेत दिया है कि भाजपा की अहिंसात्मक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता पर आधारित हिंदुत्व की व्याख्या कहीं अधिक व्यापक और गहराई से समझी जाती है, जो केवल एक नेता या पोस्टर बॉय' का विषय नहीं बन सकती। उनके अनुसार हिंदुत्व की स्थापना योग्यता, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक एव पर आधारित है।

सीएम धामी ने संवाद के दौरान यह भी कहा कि हिंदुत्व की व्याख्या समय-समय पर बदलती रही है और उसे वर्तमान सामाजिक संदर्भों के अनुसार समझाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी के सभी नेताओं का फोकस सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकासपरक नीतियों पर होना चाहिए, न कि केवल प्रचारित केय के लिए किसी एक व्यक्ति को हिंदुत्व का प्रतीक बनाने पर।

धामी के इस बयान के बाद राजनीतिक हस्तियों और समर्थकों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने लगी है। कई समर्थक इसे 'विचारशील और संतुलित' प्रतिक्रिया मान रहे हैं, जबकि कुछ आलीयक इसे 'पारंपरिक हिंदुत्व की

व्याख्या को कमजोर करने' वाला भी बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह बयान आगामी चुनावी समय में हिंदुत्व को लेकर होने वाली बहसी को प्रभावित कर सकता है और इसे एक विचारधारा के रूप में समझने का नया दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।

इस प्रकार के बयान राजनीति में अक्सर विद्यारी की दिशा बदलते हैं, क्योंकि वे केवल राजनीतिक दलों के बीच प्रतिद्‌वं‌द्विता तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जनता के सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी के इस बयान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विचारधारा और प्रतीकात्मक पहचान को बैंकर राजनीतिक नेतृत्व को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।

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