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कांग्रेस में घमासान के केंद्र रकीबुल हुसैन कौन, क्यों चर्चा?

कांग्रेस में घमासान के केंद्र रकीबुल हुसैन कौन, क्यों चर्चा?

Last Updated Feb - 18 - 2026, 03:41 PM | Source : Fela News

असम कांग्रेस में बढ़ते विवाद के बीच धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन सुर्खियों में हैं। भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस में घमासान के केंद्र रकीबुल हुसैन कौन
कांग्रेस में घमासान के केंद्र रकीबुल हुसैन कौन

असम की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर उभरे विवाद के केंद्र में धुबरी से लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन का नाम प्रमुखता से सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद पार्टी संगठन में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि रकीबुल हुसैन असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे 2024 के लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट से निर्वाचित हुए थे, जहां उन्होंने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को बड़े अंतर से हराया था। उनकी जीत का अंतर देश के सबसे बड़े अंतर में शामिल बताया गया। 

इससे पहले हुसैन नगांव जिले की समागुरी विधानसभा सीट से 2001 से 2024 तक विधायक रहे। उनके सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे तंजिल हुसैन को टिकट दिया था, हालांकि वह जीत बरकरार नहीं रख सके। 

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व के भीतर उन्हें रणनीतिक रूप से अहम नेता माना जाता है। बताया जाता है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी रहे हैं और इसी कारण पार्टी के मौजूदा नेतृत्व के साथ भी उनका भरोसेमंद संबंध माना जाता है। 

वहीं दूसरी ओर, भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ने के बाद संगठन के कामकाज को लेकर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने दावा किया कि राज्य इकाई में वास्तविक नियंत्रण सीमित हाथों में है, जिसे लेकर असंतोष पैदा हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करता है। 

इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी कहा है कि भूपेन बोरा जल्द भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं की मुलाकात भी हो चुकी है और पार्टी बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। 

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर यह घटनाक्रम राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी को राज्य में संगठनात्मक मजबूती की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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