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कांग्रेस ने फिर पुराने ज़ख्म क्यों छेड़ दिए पीएम मोदी को चाय बेचते दिखाने वाला एआई वीडियो…

कांग्रेस ने फिर पुराने ज़ख्म क्यों छेड़ दिए पीएम मोदी को चाय बेचते दिखाने वाला एआई वीडियो…

Last Updated Dec - 03 - 2025, 03:16 PM | Source : Fela News

कांग्रेस के एआई वीडियो ने मोदी को चायवाला दिखाकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा किया और सियासत गरमा दी।
कांग्रेस ने फिर पुराने ज़ख्म क्यों छेड़ दिए
कांग्रेस ने फिर पुराने ज़ख्म क्यों छेड़ दिए

Narendra Modi को लेकर फिर से राजनीति गरम रही है। इस बार Indian National Congress ने सोशल मीडिया पर एक एआई-जनित वीडियो (AI-generated video) पोस्ट किया, जिसमें उन्हें ‘चाय बेचते हुए’ दिखाया गया, लाल कालीन (red-carpet) कार्यक्रम में। इस वीडियो का मकसद क्या था, यही बात अब विवाद का केंद्र बन चुकी है। 

वीडियो में देखा गया कि प्रधानमंत्री हल्के नीले कोट और काले पैंट में, हाथ में केतली व चाय के गिलास लिए बने हुए हैं। पृष्ठभूमि में अंतरराष्ट्रीय झंडे और तिरंगा दिख रहा है, जिससे समझा जा रहा था कि यह कोई ग्लोबल समिट या बड़ा कार्यक्रम है। इस वीडियो को कांग्रेस नेता Ragini Nayak ने अपने एक्स (X) हैंडल से साझा किया और कैप्शन लिखा, “अब ये कौन किया बे” — जो विवाद की शुरुआत बना। 

वीडियो के वायरल होते ही Bharatiya Janata Party (BJP) ने जमकर हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पोस्ट को “गरीब-ओबीसी पीएम” की पृष्ठभूमि का मज़ाक उड़ाने वाला बताया और कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि कांग्रेस इस तरह नेता की गरिमा से खेल रही है और यह मुस्लिम, ओबीसी या मेहनतकश लोगों के लिए अपमानजनक है। उन्होंने कहा, “नामदार कांग्रेस कामदार पीएम को नहीं सह सकती।” 

बीजेपी ने इस वीडियो को सिर्फ मज़ाक या व्यंग्य नहीं माना, बल्कि देशभर में एक बड़ा सियासी बयान माना है। पार्टी का कहना है कि यह वीडियो साफ दर्शाता है कि कांग्रेस अब “भुतपूर्व गरीबी व संघर्ष” वाले लोगों को उनके अतीत के लिए तुच्छ समझने लगी है। उन्होंने कांग्रेस से माफी मांगने और इस तरह की सामग्री जल्द हटाने की मांग की है। 

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठा दिया है कि एआई (AI) और सोशल मीडिया के ज़रिए राजनीतिक व्यंग्य व आलोचना की कैसी सीमाएँ होनी चाहिए। क्या किसी नेता के अतीत को ध्यान में रखते हुए उसकी छवि में बदलाव करना सही है, या यह लोकतंत्र, मर्यादा और समाज की भावना के खिलाफ है? 

फिलहाल, इस विवाद ने गर्मी और रंग पकड़ ली है, और आने वाले दिनों में इसकी गूंज राजनीति में और सुनी जा सकती है।

 

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