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कोझिकोड को क्यों मिला 'City of Literature' दर्जा, जानिए कारण

कोझिकोड को क्यों मिला 'City of Literature' दर्जा, जानिए कारण

Last Updated Feb - 05 - 2026, 04:40 PM | Source : Fela News

500 से अधिक पुस्तकालय, जीवंत रीडिंग कल्चर और साहित्य महोत्सव के दम पर कोझिकोड को यूनेस्को ने 'City of Literature' घोषित किया. भारत को मिला पहला वैश्विक साहित्यि
कोझिकोड को क्यों मिला 'City of Literature' दर्जा
कोझिकोड को क्यों मिला 'City of Literature' दर्जा

केरल का ऐतिहासिक शहर कोझिकोड, जिसे कभी कालीकट के नाम से जाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ विश्व मानचित्र पर उभरा है. यूनेस्को ने इसे आधिकारिक तौर पर भारत का पहला 'City of Literature' घोषित किया है. यह सम्मान यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के अंतर्गत दिया जाता है, जहां वे शहर शामिल होते हैं जिनकी सांस्कृतिक, रचनात्मक और साहित्यिक परंपरा वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालती है. 

कोझिकोड का यह सम्मान किसी एक उपलब्धि का परिणाम नहीं, बल्कि सदियों से विकसित उस पढ़ने-लिखने की संस्कृति का प्रतिफल है, जो यहां के दैनिक जीवन में रची-बसी है. शहर में 500 से अधिक पुस्तकालय सक्रिय हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि किताबें यहां केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम भी हैं. स्थानीय चाय की दुकानों, गलियों और समुद्र तट के किनारे भी साहित्य, राजनीति और समाज पर चर्चाएं आम दृश्य हैं. 

इतिहास में कोझिकोड मसालों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध रहा है. अरब व्यापारियों से लेकर यूरोपीय नाविकों तक, कई सभ्यताओं का यहां आना-जाना रहा. इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने भाषा, विचार और साहित्य को समृद्ध किया. मलयालम साहित्य की कई महत्वपूर्ण धाराएं इसी क्षेत्र से निकलीं. कवियों, लेखकों और विचारकों की पीढ़ियों ने इस शहर की पहचान को मजबूत किया. 

यूनेस्को द्वारा City of Literature' का दर्जा देने के लिए जिन मानकों पर विचार किया जाता है, उनमें सार्वजनिक पुस्तकालयों की उपलब्धता, साहित्यिक कार्यक्रमों की निरंतरता, स्थानीय भाषा और लेखन परंपरा, तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी शामिल होती है. कोझिकोड इन सभी मानकों पर खरा उतरा. यहां आयोजित होने वाला वार्षिक साहित्य महोत्सव देश-विदेश के लेखकों, विचारकों और पाठकों को आकर्षित करता है. यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की पहचान का हिस्सा बन चुका है. 

इस उपलब्धि के साथ कोझिकोड अब एडिनबर्ग, डबलिन और प्राग जैसे विश्व-प्रसिद्ध साहित्यिक शहरों की श्रेणी में शामिल हो गया है. यह न केवल शहर के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है. इससे स्थानीय पर्यटन, सांस्कृतिक गतिविधियों और शैक्षणिक पहलों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है. 

कोझिकोड की गलियों में किताबों के प्रति जो लगाव दिखता है, वह आधुनिक डिजिटल युग में भी अनोखा है. यहां पढ़ना एक शौक नहीं, जीवनशैली है. यही जीवंत रीडिंग कल्चर' यूनेस्को को प्रभावित करने में निर्णायक साबित हुआ. 

यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि साहित्य केवल पन्नों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शहरों की आत्मा में बस जाता है. कोझिकोड ने यह दिखा दिया है कि जब समाज किताबों से जुड़ा रहता है, तो वह वैश्विक पहचान भी हासिल कर सकता है. 

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