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क्या अंबानी सच में वेनेजुएला से तेल लायेंगे

क्या अंबानी सच में वेनेजुएला से तेल लायेंगे

Last Updated Jan - 09 - 2026, 03:47 PM | Source : Fela News

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर फिर से विचार कर रही है, लेकिन इसमें अमेरिका की भूमिका अहम बनी हुई है।
क्या अंबानी सच में वेनेजुएला से तेल लायेंगे
क्या अंबानी सच में वेनेजुएला से तेल लायेंगे

हाल ही में रॉयटर्स समेत कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने का विकल्प फिर से खोल सकती है, अगर उसे यह अनुमति मिलती है कि वेनेजुएला का तेल गैर-अमेरिकी खरीदारों को बेचा जा सके।

असल में यह मामला नया नहीं है। पहले भी रिलायंस ने वेनेजुएला से तेल खरीदा था और उसके रिफाइनरियों में इसे प्रोसेस किया था, क्योंकि वे वेनेजुएला के भारी और सस्ते क्रूड को भी आसानी से रिफाइन कर सकते हैं।

लेकिन मार्च 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद रिलायंस ने अपनी खरीद रोक दी थी। उस वक्त मई 2025 में कंपनी ने आखिरी बार वेनेजुएला का तेल आयात किया था।

अब वैश्विक स्थिति बदल रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच समझौता हुआ है, जिसके तहत अमेरिका वेनेजुएला से कुछ तेल खरीद रहा है और निर्यात की रूपरेखा साफ हो रही है। इसी के चलते रिलायंस ने कहा है कि वह “नियमों के अनुरूप” स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार करेगा और फिर तेल खरीदने पर विचार करेगा।

यह निर्णय सिर्फ तेल की उपलब्धता का मामला नहीं है। तेल की वैश्विक राजनीति, अमेरिकी प्रतिबंधों और वेनेजुएला की सरकार की बदलती स्थिति का भी प्रभाव है। तेल बाजार में भारी क्रूड सस्ते में मिलता है, जिससे रिफाइनरियों को इन्वेंटरी लागत घटाने में फायदा होता है।

अमेरिका की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने पहले वेनेजुएला के तेल व्यापार पर टैरिफ लगाया था और अब स्थिति में ढील देने की बातें चल रही हैं। अगर अमेरिका नए नियमों के तहत गैर-अमेरिकी खरीदारों को वेनेजुएला का तेल खरीदने देगा, तो रिलायंस और दूसरे रिफाइनर भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

रिलायंस के बयान से यह स्पष्ट है कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए ही आगे बढ़ना चाहती है। इसलिए फिलहाल यह पूरी तरह तय नहीं है कि वेनेजुएला से तेल वास्तव में खरीदा जाएगा या नहीं, लेकिन संभावनाओं पर विचार जारी है।

इससे भारत के ऊर्जा स्रोत और तेल की सप्लाई में विविधता आ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब रूस से तेल आयात की रणनीतियाँ बदल रही हैं और तेल बाजार में वैश्विक उतार-चढ़ाव है। 

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