Last Updated Sep - 25 - 2025, 03:29 PM | Source : Fela News
आजम खान और अखिलेश यादव की मुलाकात ने यूपी के सियासी समीकरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गठबंधन, सीट बंटवारे और आगामी चुनाव की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली से ठीक एक दिन पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि आजम खान की रिहाई के सिर्फ 15 दिन बाद यह मीटिंग हुई है, जिससे इसके राजनीतिक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है।
रामपुर में हुई इस मुलाकात को मुस्लिम वोट बैंक और विपक्षी गठजोड़ की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मायावती की रैली जहां दलित-मुस्लिम समीकरण पर असर डाल सकती है, वहीं अखिलेश-आजम की नजदीकी समाजवादी पार्टी को मजबूती देने का संदेश देती है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार भर नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा समीकरण को ध्यान में रखकर की गई रणनीति भी हो सकती है। साफ है कि यूपी की राजनीति में छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।