Last Updated Mar - 08 - 2025, 03:16 PM | Source : Fela News
Holashtak 2025: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, और उसके अगले दिन, यानी चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि पर होली खेली जाती है। होली स
Holashtak 2025: चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है. होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक लग जाते हैं. इन आठ दिनों में ग्रहों की बदलती रहती है और इन दिनों में कोई भी शुभ काम करने की वर्जित माने जाते हैं इस बार होलाष्टक 7 मार्च से शुरू हो रहा है मतलब आज से और इसका समापन 13 मार्च होलिका दहन के दिन होगा और 14 मार्च को होली मनाई जाएगी
होलाष्टक क्या होता है?
पुरानी मानयतो के मुताबित अगर कोई भी होलाष्टक के दौरान कोई मांगलिक काम करता है तो उसे कई तरह की परेशनियो का सामना करना पड़ सकता है इतना ही नहीं व्यक्ति के जीवन में कहल, बीमारी और अकाल मृत्यु का साया भी मंडराने लगता है. इसलिए होलाष्टक के समय को शुभ नहीं माना जाता है
होलाष्टक के समय कभी न करे यह काम
1. इस दौरान शादी, विवाह, भूमि पूजन, गृह प्रवेश या कोई नया बिजनेस खोलना वर्जित माना जाता है.
2. शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक शुरू होने के साथ 16 संस्कार जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्यों पर भी रोक लग जाती है
3. किसी भी प्रकार का हवन, यज्ञ कर्म भी इन दिनों में नहीं किया जाता है.
4. इसके अलावा नव विवाहिताओं को इन दिनों में मायके में रहने की सलाह दी जाती है.
होलाष्टक का महत्व
होलाष्टक के ये आठ दिन भक्ति की शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान तप करना बहुत शुभ होता है। होलाष्टक में पेड़ की एक शाखा काटकर जमीन में लगाने की परंपरा है, जिस पर रंग-बिरंगे कपड़े बांधे जाते हैं। इस शाखा को प्रह्लाद का प्रतीक माना जाता है।
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