Last Updated Oct - 07 - 2025, 01:06 PM | Source : Fela news
जब हम किसी खिलाड़ी को गोल्ड मेडल जीतते हुए देखते हैं, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि यह पूरी तरह सोने का होता है। असलियत जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
जब किसी खिलाड़ी को गोल्ड मेडल मिलता है, तो यह पल न सिर्फ उसके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और खुशी का होता है। यह मेडल खिलाड़ी की सालों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोल्ड मेडल असल में कैसे होते हैं? क्या ये सच में पूरी तरह सोने के बने होते हैं, या केवल दिखावे के लिए सुनहरे रंग के होते हैं? अगर आप सोचते हैं कि ये मेडल पूरी तरह सोने के होते हैं, तो आपको असलियत जानकर हैरानी होगी।
क्या गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का होता है?
ओलंपिक में दिए जाने वाले गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने के नहीं होते। ये मुख्य रूप से चांदी से बनाए जाते हैं, और ऊपर की परत में थोड़ी मात्रा में सोना चढ़ाया जाता है। इसे पॉलिश या कोटिंग भी कहा जाता है। ओलंपिक इतिहास में आखिरी बार पूरी तरह सोने के मेडल 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक में दिए गए थे। उसके बाद से केवल चांदी पर सोने की परत चढ़ाकर गोल्ड मेडल दिए जाते हैं।
गोल्ड मेडल में कितना सोना होता है?
ओलंपिक कमेटी के नियमों के अनुसार, हर गोल्ड मेडल में कम से कम 6 ग्राम शुद्ध सोना होना जरूरी है। बाकी मेडल लगभग 92.5% चांदी से बना होता है। कुल वजन करीब 530 ग्राम होता है, जिसमें से ज्यादातर हिस्सा चांदी का होता है। केवल ऊपर की परत सोने की होती है।
सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से, 2024 के पेरिस ओलंपिक में दिया गया गोल्ड मेडल अब तक का सबसे महंगा माना गया। उस साल एक गोल्ड मेडल की कीमत लगभग 79,500 थी, जबकि 2012 में यह करीब 37,800 थी।
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