Last Updated Feb - 07 - 2026, 06:11 PM | Source : Fela News
केसर दुनिया का सबसे कीमती मसाला है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन सीमित है। जानिए किस शहर को 'केसर की राजधानी' कहा जाता है और क्यों पामपुर खास है।
केसर को दुनिया के सबसे महंगे और कीमती मसालों में गिना जाता है। इसकी खुशबू, रंग और औषधीय गुण इसे साधारण मसालों से बिल्कुल अलग बनाते हैं। यही वजह है कि केसर को "रेड गोल्ड" भी कहा जाता है। हालांकि, केसर की खेती हर जगह संभव नहीं होती, क्योंकि इसके लिए खास जलवायु, ऊंचाई और मिट्टी की जरूरत होती है। भारत में भी केसर का उत्पादन बहुत सीमित इलाकों में ही होता है। ऐसे में जनरल नॉलेज में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि भारत का कौन सा शहर "केसर की राजधानी" कहलाता है।
इस सवाल का सीधा और सटीक जवाब है— पामपुर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में स्थित पामपुर को भारत की 'केसर राजधानी' कहा जाता है। यह शहर सदियों से उच्च गुणवत्ता वाले कश्मीरी केसर के लिए जाना जाता है और आज भी देश में केसर उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
पामपुर को केसर की राजधानी कहे जाने के पीछे कई ठोस कारण हैं। यहां उगाया जाने वाला केसर गहरे लाल रंग, तीव्र खुशबू और उच्च रंग क्षमता के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में मशहूर है । पामपुर और उसके आसपास के करेवा पठार केसर की खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं। यहां की शुष्क समशीतोष्ण जलवायु, ठंडी रातें और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी केसर की फसल को बेहतरीन गुणवत्ता प्रदान करती है। यही वजह है कि पामपुर का केसर स्वाद, रंग और खुशबू – तीनों मामलों में अलग पहचान रखता है।
भारत में केसर का उत्पादन लगभग पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित है। देश में पैदा होने वाले केसर का बड़ा हिस्सा पामपुर और उसके आसपास के इलाकों से आता है। यहां के किसान आज भी पारंपरिक तरीकों से केसर की खेती करते हैं। फूलों से केसर की पतली लाल धारियां हाथों से तोड़ी जाती हैं और फिर उन्हें प्राकृतिक तरीके से सुखाया जाता है, जिससे इसके औषधीय गुण सुरक्षित रहते हैं।
वैश्विक स्तर पर बात करें तो ईरान दुनिया का सबसे बड़ा केसर उत्पादक देश है, जहां से करीब 85 से 90 प्रतिशत केसर का उत्पादन होता है। इसके बाद अफगानिस्तान, स्पेन और भारत का स्थान आता है। हालांकि, उत्पादन की मात्रा कम होने के बावजूद कश्मीरी केसर को गुणवत्ता के मामले में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ केसरों में गिना जाता है।
कश्मीरी केसर में प्राकृतिक रूप से क्रोसीन (रंग), सैफ्रानल (खुशबू) और पिक्रोक्रोसिन (स्वाद) की मात्रा अधिक होती है। इसी विशिष्टता के कारण इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी GI टैग भी मिल चुका है। GI टैग मिलने से कश्मीरी केसर की असली पहचान सुरक्षित हुई है और नकली केसर से बचाव में मदद मिली है।
आर्थिक दृष्टि से भी पामपुर का केसर बेहद अहम है। यहां हजारों परिवारों की आजीविका केसर की खेती पर निर्भर है। अपने ऊंचे बाजार मूल्य और निर्यात क्षमता के कारण केसर न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाता है, बल्कि भारत के मसाला व्यापार को भी वैश्विक पहचान दिलाता है।
भारत की 'केसर राजधानी' कहलाने का गौरव पामपुर को इसलिए मिला है, क्योंकि यहां उगाया जाने वाला केसर गुणवत्ता, परंपरा और पहचान - तीनों का अनोखा संगम है।
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