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समय को बांधने की कहानी: इंसान ने कैसे गढ़ी घड़ी की अवधारणा

समय को बांधने की कहानी: इंसान ने कैसे गढ़ी घड़ी की अवधारणा

Last Updated Jan - 12 - 2026, 04:18 PM | Source : Fela News

घड़ियों से पहले भी इंसान समय समझता था। सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति के सहारे समय मापा गया, फिर धीरे-धीरे घड़ी का आविष्कार हुआ।
इंसान ने कैसे गढ़ी घड़ी की अवधारणा
इंसान ने कैसे गढ़ी घड़ी की अवधारणा

आज हमारी ज़िंदगी का हर पल समय के हिसाब से चलता है। ऑफिस जाना हो, ट्रेन पकड़नी हो या परीक्षा देनी होहर जगह घड़ी हमारा मार्गदर्शन करती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब घड़ियां नहीं थीं, तब इंसान समय कैसे तय करता था? समय कोई अचानक बना आविष्कार नहीं है, बल्कि यह हजारों सालों में विकसित हुई एक समझ है।

प्रकृति से समय की पहली पहचान

सभ्यता के शुरुआती दौर में इंसानों ने समय को प्रकृति के संकेतों से समझा। सूरज का उगना दिन की शुरुआत और उसका ढलना दिन के अंत का संकेत माना जाता था। चांद के घटने-बढ़ने से महीनों की गणना की जाती थी। वहीं, तारों की स्थिति से मौसम और खेती के सही समय का अंदाजा लगाया जाता था। यह समय मापन पूरी तरह अनुभव और अवलोकन पर आधारित था।

24 घंटे के दिन की शुरुआत

समय को व्यवस्थित रूप से बांटने की दिशा में सबसे बड़ा योगदान प्राचीन मिस्र का माना जाता है। करीब 1550 से 1069 ईसा पूर्व के बीच मिस्रवासियों ने दिन को 24 हिस्सों में बांटा - 12 घंटे दिन के और 12 घंटे रात के। हालांकि, ये घंटे आज जैसे समान नहीं थे। गर्मियों में दिन लंबे होते थे, इसलिए घंटे भी लंबे होते थे, जबकि सर्दियों में इसके उलट ।

पहली घड़ियां कैसी थीं?

घड़ियों के शुरुआती रूप बेहद साधारण थे। सबसे पहले सूर्य घड़ी (Sun Dial) का इस्तेमाल हुआ, जिसमें सूरज की छाया से समय का अंदाजा लगाया जाता था। इसके बाद जल घड़ी (Water Clock) आई, जिसमें पानी के बहाव से समय मापा जाता था। रात या बादल वाले दिन सूर्य घड़ी बेकार हो जाती थी, तब जल घड़ी काफी उपयोगी साबित हुई।

इसके अलावा रेत घड़ी (Hourglass) और धूप घड़ी भी प्रचलन में आईं। ये सभी यंत्र समय को मोटे तौर पर माप सकते थे, लेकिन इनमें सटीकता की कमी थी।

मैकेनिकल घड़ियों का जन्म

14वीं सदी के आसपास यूरोप में पहली मैकेनिकल घड़ियों का विकास हुआ। ये बड़ी-बड़ी घड़ियां चर्चों और टावरों में लगाई जाती थीं। समय के साथ इनके आकार छोटे हुए और 17वीं सदी तक पेंडुलम घड़ी ने समय मापन को काफी सटीक बना दिया।

आधुनिक घड़ियों तक का सफर

आज हम क्वार्ट्ज और एटॉमिक घड़ियों के दौर में हैं, जो सेकेंड से भी ज्यादा सटीक समय बताती हैं। लेकिन इन अत्याधुनिक घड़ियों के पीछे हजारों सालों का अनुभव, प्रयोग और प्रकृति से सीखने की कहानी छिपी है।

कुल मिलाकर, घड़ी सिर्फ एक मशीन नहीं है, बल्कि इंसान की समय को समझने और नियंत्रित करने की लंबी यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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