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तकिया कब बन जाता है बीमारी की वजह? जानें कितने साल में बदलना है जरूरी

तकिया कब बन जाता है बीमारी की वजह? जानें कितने साल में बदलना है जरूरी

Last Updated Mar - 23 - 2026, 10:53 AM | Source : Fela News

How Often to Replace Pillow: अच्छी नींद के लिए तकिया बेहद जरूरी होता है, लेकिन समय पर इसे बदलना भी उतना ही अहम है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पुराने तकिए स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा सकते हैं, इसलिए जानें कितने समय बाद तकिया बदलना सही रहता है।
तकिया कब बन जाता है बीमारी की वजह?
तकिया कब बन जाता है बीमारी की वजह?

How Many Years Should You Use a Pillow: अच्छी और गहरी नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होती है। सिर्फ समय पर सोना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बेडरूम का माहौल और बिस्तर की गुणवत्ता भी अहम भूमिका निभाती है। इनमें तकिया एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर तकिया सही सपोर्ट नहीं देता, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय-समय पर तकिए की स्थिति जांचना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना जरूरी है।

क्यों जरूरी है सही तकिया?

हम रोजाना कई घंटों तक सिर को तकिए पर रखकर सोते हैं। ऐसे में इसकी साफ-सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक एक ही तकिया इस्तेमाल करने से एलर्जी, त्वचा पर दाने, गर्दन और कंधों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पुराने तकिए में धूल, पसीना और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं।

कितने समय में बदलना चाहिए तकिया?

नींद से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, तकिया हर 1 से 2 साल में बदल देना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि तकिया साफ, सपोर्टिव और एलर्जी से मुक्त बना रहे। हालांकि, तकिए की उम्र उसके मटेरियल और गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है। अगर सुबह उठते समय गर्दन में दर्द या अकड़न महसूस हो, या आरामदायक पोजिशन न मिले, तो यह संकेत है कि तकिया बदलने का समय आ गया है।

अलग-अलग मटेरियल की उम्र

तकिए की उम्र उसके मटेरियल पर निर्भर करती है। पॉलिएस्टर के तकिए आमतौर पर करीब एक साल तक चलते हैं, जबकि लेटेक्स या हाई-क्वालिटी फोम वाले तकिए 2 से 3 साल तक टिक सकते हैं। समय के साथ तकिए चपटे हो जाते हैं या उनमें गांठें पड़ जाती हैं, जिससे उनका सपोर्ट कम हो जाता है।

साफ-सफाई क्यों है जरूरी?

तकिए और उसके कवर को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। हर बार चादर धोते समय तकिए का कवर भी बदलना चाहिए। कई तकिए मशीन में धोए जा सकते हैं, जिससे उनमें जमा धूल, पसीना और गंदगी कम होती है। पुराने तकियों में फंगस, धूल के कण और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जो एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बनते हैं।

स्वास्थ्य पर असर

तकिया सिर और गर्दन को सही सपोर्ट देने के लिए होता है। जब यह दब जाता है या खराब हो जाता है, तो रीढ़ की हड्डी की सही स्थिति प्रभावित होती है। इससे गर्दन, कंधों और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। इसलिए समय पर तकिया बदलना और उसकी साफ-सफाई बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि आप बेहतर और स्वस्थ नींद ले सकें।

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