Last Updated May - 30 - 2026, 02:41 PM | Source : Fela News
Adhik Maas Purnima 2026 Snan-Daan: अधिकमास पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग कल बन रहा है। 31 मई को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि रहने से स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
Adhik Maas Purnima 2026 Snan-Daan Time: अधिकमास की पूर्णिमा हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है। यह विशेष पूर्णिमा लगभग तीन साल में एक बार आती है और धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व सामान्य पूर्णिमा से भी अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
इस वर्ष अधिकमास पूर्णिमा का व्रत आज रखा जा रहा है, जबकि स्नान और दान का शुभ अवसर 31 मई को मिलेगा। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि व्रत आज और स्नान-दान कल क्यों किया जाएगा।
आज व्रत और कल स्नान-दान क्यों?
पंचांग के अनुसार, अधिकमास पूर्णिमा तिथि आज सुबह 11 बजकर 57 मिनट से शुरू हो रही है। आज रात चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए आज पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है।
वहीं यह तिथि 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। चूंकि कल सूर्योदय के समय भी पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार स्नान और दान का कार्य 31 मई को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन स्नान-दान का विशेष महत्व माना जाता है।
अधिकमास पूर्णिमा पर क्यों खास है स्नान-दान?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है। अधिकमास पूर्णिमा पर किया गया स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, फल, पंखा और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं।
अधिकमास पूर्णिमा स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
अगर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान संभव न हो, तो अमृत काल या अभिजीत मुहूर्त में भी स्नान-दान किया जा सकता है।
क्या करें इस दिन?
अधिकमास पूर्णिमा पर स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल, फल, काले तिल, पंखा या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है।
तीन साल बाद आए इस दुर्लभ संयोग को बेहद शुभ माना जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु कल स्नान-दान और पूजा-पाठ के माध्यम से इस विशेष अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
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