Header Image

7 जन्मों का शुभ फल: पौष अमावस्या कब? जानें तारीख-मुहूर्त

7 जन्मों का शुभ फल: पौष अमावस्या कब? जानें तारीख-मुहूर्त

Last Updated Dec - 09 - 2025, 12:51 PM | Source : Fela News

Paush Amavasya 2025: हिंदू धर्म में पौष अमावस्या का खास महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण और दान करना कई जन्मों तक शुभ फल देने वाला माना जाता है।
7 जन्मों का शुभ फल
7 जन्मों का शुभ फल

Paush Amavasya 2025: पौष अमावस्या इस साल 19 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों के लिए तर्पण करने का विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण के अनुसार, अमावस्या पर किए गए तर्पण से पितरों को शांति मिलती है और उनकी कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

यह अमावस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पौष माह को छोटा पितृ पक्ष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किया गया दान और तर्पण सात जन्मों तक शुभ फल देता है।

पौष कृष्ण अमावस्या 2025 के मुहूर्त

  • अमावस्या शुरू: 19 दिसंबर, सुबह 04:59 बजे
  • अमावस्या समाप्त: 20 दिसंबर, सुबह 07:12 बजे
  • स्नान-दान मुहूर्त: सुबह 5:19 से 6:14 बजे तक
  • पितृ तर्पण/पितर पूजा: दोपहर 12 से 3 बजे के बीच

सूर्य पूजा का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, अमावस्या पर सूर्य की पूजा करने से अक्षय पुण्य मिलता है और सभी कार्य सफल होते हैं। ज्योतिष मान्यता है कि इस दिन सूर्य पूजा करने से रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है।

पौष अमावस्या पर क्या करें

  • किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान-पुण्य करें।
  • तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें और “ऊँ सूर्याय नम:” मंत्र का जप करें।
  • पितरों के लिए तर्पण और दान करें, जिससे सात जन्मों तक शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  • जरूरतमंदों को भोजन, कंबल और गर्म कपड़े दान करें।
  • गोशाला में गायों की सेवा या भोजन का दान करें।
  • पक्षियों के लिए दाना-पानी अवश्य रखें।

Share :

Trending this week

भारत में कब होगी बकरीद?

May - 18 - 2026

देशभर में मुसलमानों के दूसरे सबसे बड़े त्योहार बकरीद (ई... Read More

पहली बार वट सावित्री व्रत?

May - 16 - 2026

First-Time Vat Savitri Vrat: ज्येष्ठ अमावस्या पर रखा जाने वाला वट सावित्र... Read More

वट सावित्री पूजा में पहनें ये रंग

May - 15 - 2026

Auspicious colors for Vat Savitri Puja: हिंदू धर्म में हर रंग का अपना धार्मिक और ... Read More