Last Updated Jan - 23 - 2026, 10:36 AM | Source : Fela News
बसंत पंचमी सिर्फ हिंदू धर्म का त्योहार नहीं है. यह सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदायों में भी परंपरा के रूप में मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि अलग-अलग धर्मों में इस
Basant Panchmi 2026: वसंत पंचमी हर साल माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है. इस साल यह पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को पड़ेगा. इसे सरस्वती पूजा भी कहा जाता है, जो ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी हैं. लेकिन यह त्योहार सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं है. मुस्लिम, सिख और ईसाई परंपराओं में भी इसकी झलक मिलती है. आइए जानते हैं कैसे—
मुस्लिम परंपरा में बसंत पंचमी
दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में बसंत पंचमी एक दरबारी उत्सव हुआ करता था. हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो से जुड़ी परंपराएं इसका प्रमाण हैं. कहा जाता है कि अमीर खुसरो बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनकर गीत गाते थे—
“आओ बसंत बहार, पीत पहिरो हो यार.”
आज भी निजामुद्दीन दरगाह में इस दिन पीले फूल चढ़ाए जाते हैं. मुगल शासकों, खासकर जहांगीर और शाहजहां के समय में बसंत को स्प्रिंग फेस्टिवल की तरह मनाया जाता था, जिसमें पतंगबाजी, फूलों की सजावट और संगीत होता था.
सिख परंपराओं में बसंत पंचमी
सिख इतिहास में बसंत पंचमी की परंपरा काफी पुरानी है. यह पंजाब के सरसों के पीले खेतों का प्रतीक मानी जाती है. इस दिन अमृतसर के हरमंदिर साहिब में बसंत राग में कीर्तन होता है.
छठे गुरु गुरु हरगोबिंद जी का जन्म भी बसंत पंचमी के आसपास माना जाता है, जिसके अवसर पर अमृतसर के पास छेहरता साहिब गुरुद्वारे में मेला लगता है. यहां पतंगबाजी की भी परंपरा है. वहीं, दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह का विवाह भी बसंत पंचमी के दिन हुआ था, जिसे हर साल नगर कीर्तन के साथ याद किया जाता है.
ईसाई परंपराओं में बसंत का महत्व
वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही ईसाई समुदाय में ईस्टर पर्व आता है, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान का प्रतीक है. इस दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और मांस, शराब या धूम्रपान जैसी चीजों से दूरी बनाते हैं. दिन की शुरुआत चर्च में प्रार्थना से होती है और परिवार व दोस्तों के बीच फूल और ईस्टर अंडे बांटे जाते हैं.
इस तरह, बसंत पंचमी केवल एक धर्म का नहीं, बल्कि अलग-अलग समुदायों में खुशी और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है.
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