Last Updated Jan - 21 - 2026, 11:17 AM | Source : Fela News
February Vrat Tyohar 2026:फरवरी महीने में महाशिवरात्रि, शनि प्रदोष व्रत, आमलकी एकादशी जैसे कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे. इसी महीने सूर्य ग्रहण भी लगेगा. य
February Vrat Tyohar 2026: जनवरी के बाद फरवरी का महीना भी व्रत-त्योहारों के लिहाज से खास रहने वाला है. इस महीने महाशिवरात्रि, माघ पूर्णिमा, आमलकी एकादशी जैसे कई बड़े पर्व मनाए जाएंगे. फरवरी में ही साल का पहला सूर्य ग्रहण और होलाष्टक भी लगेंगे. हालांकि यह महीना मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना गया है.
फरवरी व्रत-त्योहार 2026 की सूची
· 1 फरवरी 2026 – गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती, माघ पूर्णिमा स्नान
· 2 फरवरी 2026 – फाल्गुन माह की शुरुआत
· 5 फरवरी 2026 – द्विजप्रिय संकष्टी
· 7 फरवरी 2026 – यशोदा जयंती
· 8 फरवरी 2026 – भानु सप्तमी, शबरी जयंती
· 9 फरवरी 2026 – जानकी जयंती, कालाष्टमी, मासिक जन्माष्टमी
· 13 फरवरी 2026 – विजया एकादशी, कुंभ संक्रांति
· 14 फरवरी 2026 – शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत, वैलेंटाइन डे
· 15 फरवरी 2026 – महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
· 17 फरवरी 2026 – सूर्य ग्रहण, दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या
· 18 फरवरी 2026 – चंद्र दर्शन, फुलैरा दूज
· 19 फरवरी 2026 – रामकृष्ण जयंती
· 21 फरवरी 2026 – ढुण्ढिराज चतुर्थी
· 22 फरवरी 2026 – स्कंद षष्ठी
· 23 फरवरी 2026 – मासिक कार्तिगाई
· 24 फरवरी 2026 – होलाष्टक की शुरुआत
· 27 फरवरी 2026 – आमलकी एकादशी
· 28 फरवरी 2026 – नृसिंह द्वादशी
माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान
1 फरवरी को माघ पूर्णिमा पर विशेष स्नान किया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है.
महाशिवरात्रि 2026
महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाएगी. इस दिन चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है.
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त
· पहला प्रहर: शाम 6:39 से 9:45 बजे तक
· दूसरा प्रहर: रात 9:45 से 12:52 बजे तक (16 फरवरी)
· तीसरा प्रहर: रात 12:52 से सुबह 3:59 बजे तक (16 फरवरी)
· चौथा प्रहर: सुबह 3:59 से 7:06 बजे तक (16 फरवरी)
निशिता काल: रात 12:28 से 1:17 बजे तक (16 फरवरी)
होलाष्टक में बंद होंगे शुभ कार्य
24 फरवरी से होलाष्टक शुरू होंगे. होली से पहले के आठ दिनों में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस समय को धार्मिक रूप से अशुभ माना जाता है.
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