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Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पहली बार कर रही हैं? जानिए आसान विधि और जरूरी बातें 16 शब्दों में

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पहली बार कर रही हैं? जानिए आसान विधि और जरूरी बातें 16 शब्दों में

Last Updated Aug - 04 - 2025, 11:26 AM | Source : Fela News

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज 26 अगस्त 2025 को है। इस व्रत में नियमों और विधि का ध्यान रखना जरूरी होता है, तभी यह पूरा माना जाता है और पुण्य मिलता है।
हरतालिका तीज पहली बार कर रही हैं
हरतालिका तीज पहली बार कर रही हैं

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज हिन्दू धर्म में महिलाओं का एक खास और फलदायक व्रत है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज 26 अगस्त 2025 को पड़ रही है।

कौन करता है ये व्रत?

इस व्रत को शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए करती हैं। वहीं, कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए इसे करती हैं। ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले माता पार्वती ने ये व्रत किया था, जिससे उन्हें शिव जी को पति रूप में पाने का आशीर्वाद मिला।

पहली बार व्रत कर रही हैं? जानें जरूरी बातें

हरतालिका तीज एक कठिन व्रत माना जाता है, खासकर क्योंकि यह निर्जला (बिना पानी के) होता है। इसलिए जो महिलाएं पहली बार यह व्रत कर रही हैं, उन्हें इसके नियम और पूजा विधि सही तरीके से जाननी चाहिए, तभी व्रत का फल मिलता है।

व्रत की तैयारी कैसे करें?

  • व्रत से एक दिन पहले सात्विक खाना खाएं।
  • रात को खीरा जरूर खाएं, ताकि अगले दिन पानी की कमी महसूस न हो।

व्रत का संकल्प कैसे लें?

  • व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें, नहाकर साफ या नए कपड़े पहनें। फिर ये मंत्र बोलते हुए संकल्प लें:
  • "उमा महेश्वर सायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये"

अगर पहली बार कर रही हैं तो निर्जला व्रत (बिना खाना-पानी) का संकल्प लें। एक बार व्रत शुरू करने के बाद इसे हर साल करना होता है, इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता।

दोपहर में क्या करना है?

  • दोपहर तक पूजा की तैयारी कर लें।
  • शिव जी के लिए 16 प्रकार की पत्तियां इकट्ठा करें।
  • पूजा की थाली में सभी जरूरी सामग्री और सुहाग पिटारा रखें।
  • पूजा का सही समय

हरतालिका तीज की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। रात के चारों प्रहर (भागों) में शिव-पार्वती की पूजा और भजन करना होता है। रात भर जागरण का भी महत्व होता है।

पूजा कैसे करें?

  • शाम को दोबारा स्नान करें और 16 श्रृंगार करें।
  • पूजा स्थल साफ करके वहां फुलेरा (मंडप) लगाएं।
  • मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएं और स्थापित करें।
  • सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें।
  • फिर षोडशोपचार विधि से शिव-पार्वती की पूजा करें – जल, फूल, बेलपत्र, पत्तियां, सुहाग सामग्री आदि अर्पित करें।
  • भोग लगाएं, कथा सुनें और परिक्रमा करें।
  • रात को जागरण करें।

व्रत कैसे खोलें (पारण)?

  • रात में हलवा और ककड़ी का भोग लगाएं।
  • ककड़ी खाकर व्रत तोड़ें।
  • अगले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं।
  • पूजा की सामग्री किसी सुहागिन महिला को दान करें।
  • अंत में शिव-पार्वती का विसर्जन करें।

 

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