Last Updated Mar - 19 - 2026, 01:09 PM | Source : Fela News
भारत समेत दुनिया में समय गणना के लिए अलग-अलग कैलेंडर इस्तेमाल होते हैं। आधुनिक जीवन में ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रचलित है, जबकि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए हिंदू कैलेंडर का विशेष महत्व बना हुआ है।
भारत में समय और तिथियों की गणना के लिए दो प्रमुख कैलेंडर प्रचलित हैं—हिंदू कैलेंडर और ग्रेगोरियन कैलेंडर। जहां ग्रेगोरियन कैलेंडर पूरी दुनिया में आधिकारिक रूप से इस्तेमाल होता है, वहीं हिंदू कैलेंडर का उपयोग धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय कार्यों के लिए किया जाता है। साल 2026 में हिंदू नववर्ष की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, जिसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में मनाया जाएगा।
क्या है ग्रेगोरियन कैलेंडर
ग्रेगोरियन कैलेंडर आज दुनिया में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला कैलेंडर है। इसे वर्ष 1582 में पोप ग्रेगरी तेरहवें द्वारा लागू किया गया था। यह पूरी तरह सौर आधारित कैलेंडर है, जिसमें पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने के समय के आधार पर वर्ष तय किया जाता है। इसमें एक साल में 365 दिन होते हैं, जबकि लीप ईयर में 366 दिन होते हैं। साल को 12 महीनों—जनवरी से दिसंबर—में बांटा गया है। इसका उपयोग सरकारी, शैक्षणिक और अंतरराष्ट्रीय कामकाज में किया जाता है।
क्या है हिंदू कैलेंडर
हिंदू कैलेंडर एक चंद्र-सौर प्रणाली पर आधारित होता है, यानी इसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति को ध्यान में रखा जाता है। इसमें महीनों की गणना चंद्रमा के चक्र के अनुसार होती है और एक महीने में 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित होती हैं।
हिंदू कैलेंडर में कुल 12 महीने होते हैं—चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। इसमें साल के कुल दिन लगभग 354 होते हैं, इसलिए समय-समय पर इसमें समायोजन भी किया जाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू कैलेंडर केवल समय गिनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय परंपराओं और आस्था का आधार है। इसी के अनुसार नवरात्रि, दीपावली, होली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। इसके अलावा विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए पंचांग का सहारा लिया जाता है।
दोनों कैलेंडर में अंतर
हिंदू कैलेंडर खगोलीय घटनाओं और ग्रह-नक्षत्रों पर आधारित होने के कारण अधिक लचीला और विविध है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता और सुविधा के लिए बनाया गया है।
इस तरह दोनों कैलेंडर अपने-अपने उपयोग और महत्व के अनुसार अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं।
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