Last Updated Dec - 04 - 2025, 11:57 AM | Source : Fela News
Islamic calendar: इस्लामी कैलेंडर एक चंद्र आधारित प्रणाली है, जो चंद्रमा के दिखने पर तय होती है. इसमें 12 महीने होते हैं और कुरान में साफ कहा गया है कि इन महीनो
Islam: हिजरी या इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा के चक्रों पर आधारित 12 महीनों का कैलेंडर है, जबकि हम रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाला ग्रेगोरियन कैलेंडर सूरज के आधार पर चलता है। इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत पैगंबर मोहम्मद के मक्का से मदीना हिजरत के बाद मानी जाती है।
इस कैलेंडर में नया महीना चांद दिखने पर शुरू होता है। अगर 29वें दिन चांद दिख जाए तो नया महीना शुरू हो जाता है, और अगर न दिखे तो 30 दिन पूरे करके अगला महीना शुरू किया जाता है। इसी वजह से इसे रूयत-ए-हिलाल कहा जाता है।
इस्लाम में चंद्र कैलेंडर की मान्यता क्यों?
कुरान में साफ तौर पर कहा गया है कि एक साल में 12 ही महीने होंगे और इनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसी कैलेंडर के आधार पर रमजान, हज, ईद, आशूरा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक दिन तय होते हैं।
इस्लामी कैलेंडर के 12 महीने
कैलेंडर में चार महीने पवित्र माने जाते हैं—मुहर्रम, रजब, ज़ुल-कादा और ज़ुल-हिज्जा। इन महीनों में इस्लाम-पूर्व समय से ही युद्ध पर रोक रही है और इस्लाम में भी इस परंपरा को जारी रखा गया है।
मुहर्रम: पवित्र महीना, आशूरा इसी में आता है
सफर: आम महीना, इसके बारे में गलत धारणाएं प्रचलित
रबी अल-अव्वल: पैगंबर का जन्म और निधन इसी में
रबी अल-सानी: सीखने और चिंतन का समय
जुमादा अल-अव्वल व सानी: मौसम आधारित नाम
रजब: पवित्र महीना
शाबान: रमजान की तैयारी का समय
रमजान: रोज़ा और कुरान के अवतरण का महीना
शव्वाल: ईद-उल-फित्र से शुरुआत
ज़ुल-कादा: पवित्र महीना
ज़ुल-हिज्जा: हज और ईद-उल-अजहा का महीना
यह कैलेंडर मुसलमानों के धार्मिक कार्यों, त्योहारों और पवित्र दिनों की सही गणना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
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