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Jagannath Rath Yatra 2026 Date: जगन्नाथ रथ यात्रा कब है? तिथि, महत्व और खास परंपराएं जानें

Jagannath Rath Yatra 2026 Date: जगन्नाथ रथ यात्रा कब है? तिथि, महत्व और खास परंपराएं जानें

Last Updated Apr - 10 - 2026, 11:54 AM | Source : Fela News

Jagannath Rath Yatra 2026 Date: जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर मंदिर से गुंडिया मंदिर तक यात्रा करते हैं, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है
जगन्नाथ रथ यात्रा कब है?
जगन्नाथ रथ यात्रा कब है?

Jagannath Rath Yatra 2026 Date:भारत के सबसे भव्य और आस्था से जुड़े पर्वों में से एक जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। उड़ीसा के पुरी में आयोजित होने वाला यह विशाल आयोजन सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस पवित्र यात्रा को रथ यात्रा या श्री गुंडीचा यात्रा भी कहा जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथों पर सवार होकर मंदिर से गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) तक जाते हैं।

2026 में कब है रथ यात्रा?

पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। साल 2026 में यह पावन पर्व गुरुवार, 16 जुलाई को मनाया जाएगा। द्वितीया तिथि 15 जुलाई सुबह 11:50 बजे से शुरू होकर 16 जुलाई सुबह 08:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 16 जुलाई को ही रथ यात्रा का आयोजन होगा।

क्यों खास है यह यात्रा?

जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो भक्त भगवान का नाम लेते हुए रथ के साथ गुंडिचा मंदिर तक पहुंचता है, उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।

तीन रथों की अनोखी परंपरा

इस यात्रा की सबसे खास बात है तीन विशाल रथों का निर्माण। भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम ‘नंदीघोष’ है, जो 16 पहियों वाला सबसे बड़ा रथ होता है। भगवान बलभद्र ‘तालध्वज’ रथ पर सवार होते हैं, जिसमें 14 पहिए होते हैं। वहीं देवी सुभद्रा ‘दर्पदलन’ रथ में विराजमान होती हैं, जो 12 पहियों वाला होता है। इन रथों को बेहद आकर्षक रंगों और पारंपरिक सजावट से तैयार किया जाता है।

छेरा पहरा रस्म की अनोखी परंपरा

रथ यात्रा से पहले एक विशेष रस्म निभाई जाती है, जिसे ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है। इस परंपरा में उड़ीसा के महाराज स्वयं सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा समाज में समानता और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।

नौ दिन तक चलता है भव्य उत्सव

जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि करीब नौ दिनों तक चलने वाला भव्य उत्सव है। भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में कुछ दिन विश्राम करते हैं और फिर ‘बहुदा यात्रा’ के जरिए वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं। इस दौरान भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

देश-विदेश से उमड़ती है भीड़

इस भव्य आयोजन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। पूरी पुरी नगरी इस दौरान भक्ति और उत्साह के रंग में डूबी नजर आती है।

कुल मिलाकर, जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था, परंपरा और भव्यता का ऐसा संगम है, जो हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है और भारतीय संस्कृति की अनूठी झलक पेश करता है।

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