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Navratri 2 Day Maa Brahmacharini: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और मनचाहा फल, जानें विधि मंत्र आरती

Navratri 2 Day Maa Brahmacharini: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और मनचाहा फल, जानें विधि मंत्र आरती

Last Updated Mar - 20 - 2026, 11:53 AM | Source : Fela News

Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है, जिन्हें तप और संयम की देवी माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती और शुभ योग के बारे में जानना विशेष महत्व रखता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और मनचाहा फल
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और मनचाहा फल

Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि 2026 के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना के बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह स्वरूप तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां को सफेद वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बनता है, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी नाम का अर्थ ‘तप का आचरण करने वाली’ देवी होता है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ तप या तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसलिए उन्हें तप की देवी कहा जाता है। उनकी पूजा करने से भक्तों में धैर्य, संयम और तप की शक्ति बढ़ती है, साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

नवरात्र के दूसरे दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद मां का ध्यान करते हुए पूजा शुरू करनी चाहिए। पूजा में फूल, चंदन, अक्षत, रोली और धूप अर्पित की जाती है। मां को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराने के बाद उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन शर्करा या गुड़ का भोग लगाना शुभ माना जाता है, जिससे आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम:” मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा ध्यान मंत्र का भी पाठ किया जाता है, जिसमें देवी के स्वरूप और उनकी शक्ति का वर्णन होता है।

आरती के समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। आरती विषम संख्या यानी 1, 5 या 7 बत्तियों से करनी चाहिए। देवी की आरती कुल 14 बार उतारी जाती है—4 बार चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार मुख से और 7 बार पूरे शरीर से।

कुल मिलाकर, नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को ज्ञान, संयम और मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।

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