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Ramayana katha:राम-भरत साथ नहीं जन्मे? जानिए क्यों सबसे गुस्सैल थे लक्ष्मण

Ramayana katha:राम-भरत साथ नहीं जन्मे? जानिए क्यों सबसे गुस्सैल थे लक्ष्मण

Last Updated Apr - 28 - 2026, 04:24 PM | Source : Fela News

भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कथा में बताया गया कि चारों भाई एक साथ नहीं जन्मे थे और लक्ष्मण के तेज स्वभाव की वजह भी बेहद रोचक है.
राम-भरत साथ नहीं जन्मे?
राम-भरत साथ नहीं जन्मे?

Lord Rama brothers birth: रामायण में भगवान श्रीराम के शांत स्वभाव और लक्ष्मण के तेज-तर्रार व्यक्तित्व की चर्चा हमेशा होती है. एक तरफ श्रीराम मर्यादा, धैर्य और करुणा के प्रतीक माने जाते हैं, तो वहीं लक्ष्मण अन्याय के सामने तुरंत भड़क उठने वाले योद्धा के रूप में दिखते हैं. ऐसे में लोगों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि क्या चारों भाइयों का जन्म एक ही समय हुआ था? और अगर नहीं, तो लक्ष्मण का स्वभाव इतना उग्र क्यों था? इसी रहस्य से कथावाचक जगद्गुरु हरिप्रपन्नाचार्य महाराज ने अपनी कथा में पर्दा उठाया.

चारों भाइयों का जन्म एक साथ नहीं हुआ था

कथा के अनुसार भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म अलग-अलग दिन और अलग-अलग नक्षत्रों में हुआ था. सबसे पहले कर्क लग्न में मंगलवार के दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ. यही कारण माना जाता है कि उनके स्वभाव में गंभीरता, धैर्य और मर्यादा का अद्भुत संतुलन था.

इसके बाद दूसरे दिन पुष्य नक्षत्र और मीन लग्न में भरत का जन्म हुआ. भरत त्याग, प्रेम और समर्पण के प्रतीक माने जाते हैं. वहीं तीसरे दिन अश्लेषा नक्षत्र में लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ, जिसने उनके व्यक्तित्व को अलग पहचान दी.

लक्ष्मण के गुस्सैल स्वभाव की वजह क्या थी?

ज्योतिष शास्त्र में अश्लेषा नक्षत्र को तेज, तीव्र प्रतिक्रिया और आत्मसम्मान से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है. कहा जाता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अन्याय, अपमान या गलत बात को तुरंत बर्दाश्त नहीं करते. यही गुण लक्ष्मण में भी साफ दिखाई देता है.

लक्ष्मण का क्रोध निजी स्वार्थ का नहीं, बल्कि धर्म, परिवार और श्रीराम के सम्मान की रक्षा का था. इसलिए उनका गुस्सा हमेशा न्याय के पक्ष में खड़ा नजर आता है.

परशुराम संवाद में दिखा लक्ष्मण का उग्र रूप

इस स्वभाव की सबसे बड़ी झलक सीता स्वयंवर के बाद देखने को मिलती है. जब भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ा और भगवान परशुराम क्रोधित होकर सभा में पहुंचे, तब लक्ष्मण चुप नहीं रहे. परशुराम के कठोर शब्दों का उन्होंने तीखे अंदाज में जवाब दिया.

लक्ष्मण ने साफ कहा कि पुराने धनुष के टूटने पर इतना क्रोध क्यों? उनके शब्दों में वही तेज था, जो अश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव माना जाता है. यह प्रसंग दिखाता है कि लक्ष्मण अन्याय या अपमान के सामने मौन रहने वालों में नहीं थे.

अश्लेषा नक्षत्र वालों में होते हैं ये गुण

ज्योतिष के अनुसार अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोग तेज बुद्धि, गहराई से सोचने वाले, रहस्यमयी और आत्मसम्मानी होते हैं. उनका गुस्सा अचानक आता है, लेकिन उसके पीछे कोई ठोस कारण होता है. वे हर बात को भीतर तक महसूस करते हैं और अपनों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं.

यही वजह है कि लक्ष्मण सिर्फ गुस्सैल नहीं थे, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर एक प्रखर योद्धा थे. रामायण का यह रहस्य आज भी भक्तों को हैरान कर देता है.

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