Last Updated Jan - 30 - 2026, 04:44 PM | Source : Fela News
फरवरी 2026 में हिन्दू पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार दो प्रमुख एकादशी तिथियां हैं। विजया और आमलकी एकादशी के व्रत तिथि और पारण मुहूर्त से जुड़ी जानकारी जारी है।
फरवरी 2026 में पहले महत्वपूर्ण एकादशी व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को विजया एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। यह एकादशी फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर आती है और इस दिन का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। तिथि 12 फरवरी को दोपहर 12:22 बजे से शुरू होकर 13 फरवरी को दोपहर 02:25 बजे तक रहेगी। व्रत पारण यानी उपवास तोड़ने का शुभ समय अगले दिन 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 बजे तक का मुहूर्त बताया जा रहा है। दान, पूजा और विशेष विधि से व्रत रखने को श्रद्धालु पुण्य का कार्य मानते हैं।
इसी महीने दूसरी एकादशी आमलकी एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार को है। यह शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर आती है और आंवला (आमला) के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन की तिथि 27 फरवरी को ही 00:33 बजे से प्रारंभ होकर रात 10:32 बजे तक रहेगी। पारण समय सामान्यतः 28 फरवरी की सुबह के समय निर्धारित किया जाता है, जब सूर्य उदय हो जाता है। आमलकी एकादशी को स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष से जुड़ी मान्यताएं बताई जाती हैं।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि किसी भी एकादशी के व्रत को विधिपूर्वक करने के लिए स्थानीय पंचांग में बताए गए सटीक तिथि, योग तथा पारण समय को अपनाना जरूरी होता है। इसके अलावा दान, भगवान विष्णु और आमला वृक्ष की पूजा से व्रत का फल अधिक मान्य माना जाता है।
अर्थशास्त्र के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत न केवल जीवन में विजय और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है, बल्कि आमलकी एकादशी स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी शुभता लाने वाला बताया जाता है। ये दोनों एकादशी तिथि विश्वासियों के लिए धार्मिक समर्पण और आध्यात्मिक अनुशासन का अवसर होती हैं।
ज्योतिष और हिंदू धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी व्रत का पालन मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि इस दिन उपवास के साथ भगवान विष्णु की भक्ति और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल की प्राप्ति होती है।
फरवरी 2026 की ये दोनों एकादशियां धार्मिक समुदाय में विशेष स्थान रखती हैं और श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा विधि व पारण समय का पालन करेंगे।
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