Last Updated Nov - 24 - 2025, 04:56 PM | Source : Fela News
अयोध्या में 25 नवंबर को विवाह पंचमी और अभिजीत मुहूर्त के दुर्लभ संयोग में धर्म ध्वजारोहण होगा।
अयोध्या में 2025 का धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम एक बेहद पवित्र और दुर्लभ संयोग में होने जा रहा है। राम मंदिर परिसर में इस खास दिन की तैयारियां पहले से ही चर्चा में हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है, आखिर 25 नवंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? धार्मिक गणना के अनुसार यह दिन कई शुभ योगों का संगम है, जो इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
25 नवंबर को विवाह पंचमी का पावन पर्व पड़ रहा है। यह वही तिथि है जब परंपरा के अनुसार भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस दिन का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि इसे रामायण परंपरा में शुभता, सौभाग्य और धर्म विजय का प्रतीक माना जाता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यही कारण है कि ध्वजारोहण के लिए विवाह पंचमी को चुना गया, ताकि कार्यक्रम आध्यात्मिक रूप से और भी भव्य रूप ले सके।
इसके साथ ही इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि अभिजीत मुहूर्त में किए गए कार्य सफलता, स्थिरता और पवित्रता का आशीर्वाद देते हैं। कई महत्वपूर्ण धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम इसी मुहूर्त में किए जाते हैं क्योंकि इसे देवताओं का प्रिय समय कहा गया है।
पंचांग के अनुसार 25 नवंबर को एक और दुर्लभ संयोग बन रहा है, धर्म और विजय से जुड़े योग का मिलन। यह संयोजन कई साल बाद आता है और राम मंदिर के लिए इसे विशेष माना जा रहा है। मंदिर निर्माण के बाद यह पहला मौका होगा जब इतना बड़ा ध्वजारोहण कार्यक्रम इन शुभ योगों के साथ आयोजित किया जाएगा।
अयोध्या में तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं। मंदिर परिसर में सजावट, पूजा-विधान और कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। लाखों भक्तों के आने की संभावना के चलते प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था पर लगातार काम कर रहा है। स्थानीय साधु-संतों का कहना है कि यह दिन अयोध्या के आध्यात्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा।
25 नवंबर का यह दुर्लभ संयोग न सिर्फ धार्मिक महत्व को बढ़ाता है, बल्कि आगामी ध्वजारोहण को भी एक ऐतिहासिक क्षण बना देता है। अयोध्या एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति की भावनाओं से भरने को तैयार है।
यह भी पढ़ें: