Last Updated Feb - 21 - 2026, 04:48 PM | Source : Fela News
होली से जुड़ी पौराणिक कथा में भगवान शिव और कामदेव प्रसंग प्रमुख। जानें क्यों तपस्या भंग होने पर शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म किया।
होली का त्योहार जहां रंगों और उत्सव का प्रतीक माना जाता है, वहीं इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक प्रमुख कथा में भगवान शिव और कामदेव का प्रसंग बताया जाता है, जिसमें शिव द्वारा कामदेव को भस्म करने की घटना का उल्लेख मिलता है।
बताया जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं। उस समय शिव गहन ध्यान में लीन थे और किसी भी सांसारिक विषय से दूर थे। देवताओं को यह चिंता थी कि शिव और पार्वती का विवाह आवश्यक है, क्योंकि उनके पुत्र से ही तारकासुर नामक असुर का वध संभव होगा। ऐसे में देवताओं ने कामदेव से शिव की तपस्या भंग करने का अनुरोध किया।
रिपोर्ट के मुताबिक कामदेव ने शिव पर पुष्प बाण चलाया, जिससे उनका ध्यान भंग हो गया। ध्यान टूटने पर शिव को जब इस बात का पता चला कि उनकी साधना में व्यवधान डाला गया है, तो वे क्रोधित हो उठे। क्रोध में उन्होंने तीसरा नेत्र खोल दिया, जिसकी ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। इस घटना के बाद कामदेव की पत्नी रति विलाप करने लगीं। बाद में शिव ने उन्हें वरदान दिया कि कामदेव निराकार रूप में संसार में मौजूद रहेंगे।
बताया जा रहा है कि इसी घटना को कई स्थानों पर होलिका दहन और होली के प्रसंगों से भी जोड़ा जाता है। इस बीच कुछ परंपराओं में प्रेम और भक्ति से जुड़े प्रसंगों का संबंध राधा रानी और श्री कृष्ण की लीलाओं से भी बताया जाता है, जहां रंगों का उत्सव प्रेम और आनंद का प्रतीक माना गया है।
सूत्रों के मुताबिक होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा उत्सव भी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इससे संबंधित कथाएं भिन्न रूपों में सुनाई जाती हैं, लेकिन शिव और कामदेव का प्रसंग प्रमुख रूप से लोकप्रिय है। इसी कारण कई लोग होली के अवसर पर इस कथा का स्मरण भी करते हैं।
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