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रक्षाबंधन के बाद अगस्त में कौन सा बड़ा त्योहार मनाया जाएगा? जानिए यहां पूरी जानकारी

रक्षाबंधन के बाद अगस्त में कौन सा बड़ा त्योहार मनाया जाएगा? जानिए यहां पूरी जानकारी

Last Updated Aug - 11 - 2025, 05:14 PM | Source : Fela News

Bhadrapad Festival 2025: भाद्रपद महीना गणेश और श्रीकृष्ण को समर्पित है। 7 सितंबर तक यह माह रहेगा। रक्षाबंधन के बाद भादो में आने वाले बड़े त्योहार के बारे में जा
रक्षाबंधन के बाद अगस्त में कौन सा बड़ा त्योहार मनाया जाएगा?
रक्षाबंधन के बाद अगस्त में कौन सा बड़ा त्योहार मनाया जाएगा?

August Vrat 2025, Janmashtami: सावन के आखिरी त्योहार रक्षाबंधन के बाद अब भाद्रपद माह शुरू हो चुका है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं, जिनकी हिंदू धर्म में खास मान्यता है। आइए जानते हैं, रक्षाबंधन के बाद भादो में कौन-सा बड़ा त्योहार आने वाला है।

रक्षाबंधन के बाद जन्माष्टमी कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में मनाई जाती है। भाद्रपद माह की अष्टमी की रात, वासुदेव और देवकी के घर उनके आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस साल जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी की पूजा का महत्व

पुराणों के अनुसार इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने कंस, जरासंध और कालयवन जैसे राक्षसों का वध किया और पांडवों की मदद कर अधर्म का नाश किया। संतान प्राप्ति और शत्रु पर विजय के लिए इस दिन की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।

कान्हा का जन्मोत्सव रात में क्यों मनाया जाता है?

कृष्ण का जन्म भादो कृष्ण अष्टमी की रात, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में हुआ था। यह शुभ समय द्वापर युग में रात 12 बजे था, इसलिए हर साल जन्माष्टमी रात्रि में मनाने की परंपरा है।

जन्माष्टमी पर व्रत का कारण

इस दिन व्रत रखने से भक्त पूरी एकाग्रता से पूजा कर पाते हैं। निराहार रहने से आलस और ध्यान भटकने की समस्या नहीं होती। साथ ही व्रत से पाचन तंत्र को भी आराम मिलता है।

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव

श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन में जन्माष्टमी बेहद भव्य रूप से मनाई जाती है। यहां भक्त जुलूस निकालते हैं, भजन गाते हैं और कृष्ण-लीला का मंचन करते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है और रात 12 बजे अभिषेक के साथ विशेष मंगला आरती की जाती है, जो साल में केवल एक बार होती है।

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