Last Updated Nov - 25 - 2025, 03:28 PM | Source : Fela News
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आज अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वज फहराने का कार्यक्रम आयोजित है। यह कार्यक्रम सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उसके पीछे का कारण 44-मिनट का शृंखला मुहूर्त और ध्वज-उच्चारण की गहरी मान्यता है।
सबसे पहले इस ध्वजारोहण मुहूर्त की बात करें तो इसे शुभ मुहूर्त के रूप में सुबह 11:45 से 12:29 बजे (लगभग 44 मिनट) के लिए निर्धारित किया गया है। इस अवधि को सनातन धर्म में “अभिजीत मुहूर्त” के नाम से जाना जाता है। अभिजीत मुहूर्त को वह समय माना जाता है जब कार्य में बाधा कम होती है, फल-सिद्धि की संभावना अधिक होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा भी मानी जाती है।
इसके अलावा ध्वज फहराने का धर्म-प्रतीक महत्व भी गहरा है। मंदिर के शिखर पर केसरिया रंग का ध्वज फहराना शक्ति, विजय, भक्ति और संस्कार का प्रतीक माना जाता है। ध्वज पर अंकित प्रतीक-चिन्ह जैसे सूर्य, ‘ॐ’ और कोविदार वृक्ष भी धार्मिक दृष्टि से विशेष हैं , ये आराध्य, जीवन शक्ति और सनातन धर्म की परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आज यह आयोजन इसलिए और भी महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि मंदिर के निर्माण-कार्य की पूर्णता और आस्था की विजय का प्रतीक माना जा रहा है। जहाँ तक मुहूर्त की बात है, 44-मिनट की अवधि विस्तार में नहीं बल्कि एक विशेष खिड़की के रूप में चुनी गई है, जो ज्योतिषीय/पंचांगीय हिसाब से मंत्र-योग, समय-योग के अनुकूल है।
संक्षिप्त में कहें तो: आज का ध्वजारोहण इस मुहूर्त-वाले 44 मिनट में इसलिए तय किया गया क्योंकि इसे बाधामुक्त, शुभ और दिव्य माना जाता है और ध्वज फहराना मंदिर की पवित्रता, शक्ति और आस्था की एक नई अवस्था का उद्घोष है।