Header Image

शनि देव की पूजा में कड़वा तेल और लोहा क्यों चढ़ाया जाता है? जानें रहस्य

शनि देव की पूजा में कड़वा तेल और लोहा क्यों चढ़ाया जाता है? जानें रहस्य

Last Updated Mar - 14 - 2026, 11:28 AM | Source : Fela News

Shani Dev: शनिवार के दिन शनि देव की पूजा में सरसों का तेल और लोहा चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसके पीछे पौराणिक कथा, ज्योतिषीय मान्यता और धार्मिक महत्व जुड़े हुए हैं। आइए जानते हैं कि शनि देव की पूजा में इन चीजों को चढ़ाने का क्या कारण माना जाता है।
शनि देव की पूजा में कड़वा तेल और लोहा क्यों चढ़ाया जाता है? जानें रहस्य
शनि देव की पूजा में कड़वा तेल और लोहा क्यों चढ़ाया जाता है? जानें रहस्य

Shani Dev: भारतीय धर्म और ज्योतिष परंपरा में शनि देव को न्याय, कर्मफल और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। अक्सर लोग शनि का नाम सुनते ही डर या कठिन समय की कल्पना करते हैं, लेकिन शास्त्रों में उन्हें कर्मों का निष्पक्ष न्याय करने वाला ग्रह बताया गया है। यही वजह है कि शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनि मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और सरसों का तेल व लोहा चढ़ाते हैं।

हालांकि कई लोगों के मन में सवाल होता है कि शनि देव की पूजा में इन चीजों का ही विशेष महत्व क्यों माना जाता है। दरअसल इसके पीछे पौराणिक कथाएं, ज्योतिषीय मान्यताएं और आध्यात्मिक संदेश जुड़े हुए हैं।

शनि देव का स्वभाव और प्रतीक

ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन और कठिन परिश्रम से जुड़ा ग्रह माना जाता है। उनका स्वभाव गंभीर और धैर्यपूर्ण बताया गया है। शनि किसी को बिना कारण कष्ट नहीं देते, बल्कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि से जुड़े कुछ प्रतीक भी बताए गए हैं, जैसे काला या गहरा नीला रंग, धातु के रूप में लोहा, द्रव्य के रूप में तिल और सरसों का तेल तथा वाहन के रूप में कौआ।

शनि पूजा में सरसों का तेल क्यों चढ़ाया जाता है

शनि देव की पूजा में सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है। ज्योतिष में सरसों का तेल शनि से जुड़ा द्रव्य माना जाता है, क्योंकि इसकी प्रकृति गहरी और भारी होती है, जो शनि ग्रह के स्वभाव से मेल खाती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार हनुमान जी और शनि देव का सामना हुआ था। उस समय हनुमान जी की शक्ति से शनि को चोट लग गई थी। तब हनुमान जी ने उनके शरीर पर सरसों का तेल लगाया, जिससे उन्हें आराम मिला। इसी वजह से यह मान्यता बनी कि शनि देव को तेल अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से भी तेल चढ़ाने का अर्थ यह माना जाता है कि व्यक्ति अपने अहंकार और कठोरता को त्यागकर जीवन में संतुलन और धैर्य अपनाने का प्रयास करता है।

लोहा चढ़ाने का महत्व

शनि पूजा में लोहे का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह की धातु लोहा मानी जाती है। इसलिए शनिवार को लोहे से बनी वस्तुएं, जैसे कील या छल्ला अर्पित करने की परंपरा है।

लोहा मजबूत और कठोर धातु है, जो अनुशासन और कठोर परिश्रम का प्रतीक माना जाता है। इस कारण लोहे का दान या अर्पण व्यक्ति के जीवन में मेहनत और जिम्मेदारी का संदेश देता है।

शनि पूजा का आध्यात्मिक संदेश

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि पूजा में उपयोग होने वाली चीजें केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि जीवन के लिए संदेश भी देती हैं। तेल संतुलन और धैर्य का प्रतीक है, जबकि लोहा अनुशासन और कठोर परिश्रम का।

क्या केवल पूजा से शनि प्रसन्न होते हैं?

धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा तरीका अच्छे कर्म करना है। माना जाता है कि शनि उन लोगों पर विशेष कृपा करते हैं जो मेहनती, ईमानदार और जरूरतमंदों की मदद करने वाले होते हैं।

इस तरह शनि देव की पूजा में कड़वा तेल और लोहा चढ़ाने की परंपरा के पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े गहरे संदेश भी छिपे हुए हैं।

यह भी पढ़े 

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि से पहले घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, दूर होगी नकारात्मकता और आएगी समृद्धि

Share :

Trending this week

राम-भरत साथ नहीं जन्मे?

Apr - 28 - 2026

Lord Rama brothers birth: रामायण में भगवान श्रीराम के शांत स्वभाव और लक... Read More

पूजा घर में दो शंख क्यों?

Apr - 23 - 2026

Two Conch Shells Benefits: हिंदू धर्म में शंख का विशेष धार्मिक और आध्यात... Read More

त्रिशूर मंदिर में आतिशबाजी हादसा

Apr - 22 - 2026

Thrissur Pooram Festival In Kerala:केरल के Thrissur शहर में इन दिनों प्रसिद्ध Thrissur Pooram... Read More