Last Updated Feb - 25 - 2026, 02:37 PM | Source : Fela News
होलिका दहन से जुड़ी मान्यताओं में पांच प्रकार के लोगों को अग्नि देखने से बचने की सलाह दी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार नई दुल्हन के मायके जाने की परंपरा भी इसी विश्वास से जुड़ी मानी जाती है।
हिंदू परंपराओं में होली से पहले होने वाला होलिका दहन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इस अनुष्ठान से कई लोक मान्यताएं भी जुड़ी हैं, जिनमें कुछ लोगों को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक विश्वासों के मुताबिक यह सावधानी उनके स्वास्थ्य, जीवन की नई अवस्था या पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बताई गई है।
बताया जाता है कि होलिका दहन की कथा में भक्त प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका का उल्लेख मिलता है, जिसमें अग्नि में बैठने के बावजूद प्रह्लाद सुरक्षित रहता है और होलिका जल जाती है। इसी कथा के प्रतीक के रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार मान्यता है कि नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों, हाल ही में विवाह हुए दंपति और कुछ विशेष परिस्थितियों से गुजर रहे लोगों को होलिका दहन की अग्नि से दूरी रखनी चाहिए। इसे पूरी तरह आस्था आधारित परंपरा बताया गया है, जिसका उद्देश्य सावधानी और शुभता बनाए रखना माना जाता है।
इस बीच नई दुल्हन के होली से पहले मायके जाने की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है। बताया जाता है कि विवाह के बाद पहली होली कई परिवारों में लड़की अपने मायके में मनाती है। इसके पीछे एक कारण यह भी माना जाता है कि वैवाहिक जीवन की शुरुआत कर रही महिला को होलिका दहन की अग्नि और उससे जुड़े प्रतीकों से दूर रखा जाए, ताकि उसके वैवाहिक जीवन पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में इसे पारिवारिक परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़ा जाता है, जहां बेटी पहली होली अपने माता-पिता के साथ मनाती है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल मिलाकर ये सभी मान्यताएं धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं का हिस्सा हैं, जिनका पालन अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार करते हैं।
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