Last Updated Jan - 23 - 2026, 03:49 PM | Source : Fela News
टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सहमति के बावजूद राजनीतिक बयान सामने आए हैं। भारत में खेलने के मुद्दे पर सरकार और क्रिकेट जगत में मतभेद दिख
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के संभावित भारत आयोजन को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक और खेल जगत से जुड़े बयान चर्चा में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ी भारत में टूर्नामेंट खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन इस मुद्दे पर सरकारी स्तर से अलग रुख सामने आया। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश सरकार में कानून मामलों से जुड़े मंत्री आसिफ नजरूल के बयान के बाद यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के भीतर यह संकेत मिले थे कि खिलाड़ी पेशेवर प्रतिबद्धताओं के तहत भारत में खेलने को तैयार हैं। लिटन दास और नजमुल हसन शांतो जैसे सीनियर खिलाड़ियों की ओर से भी खेल के नजरिये से किसी आपत्ति की बात सामने नहीं आई थी। हालांकि, आधिकारिक रूप से खिलाड़ियों की तरफ से इस मुद्दे पर कोई खुला बयान दर्ज नहीं किया गया है।
इस बीच, आसिफ नजरूल के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने भारत में खेलने को लेकर मौजूदा द्विपक्षीय हालात और घरेलू जनभावनाओं का हवाला दिया। उनके बयान के बाद सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों की राय को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।
वहीं दूसरी ओर, क्रिकेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि आईसीसी टूर्नामेंट में मेजबान देश का चयन और उसमें भागीदारी का फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों और बोर्ड स्तर पर लिया जाता है। ऐसे में किसी एक देश की आंतरिक राजनीति का असर खिलाड़ियों की भागीदारी पर पड़ना असामान्य स्थिति मानी जा रही है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि सरकारों की भूमिका वीजा, सुरक्षा और कूटनीतिक पहलुओं तक सीमित रहती है।
प्रशासन का कहना है कि अभी तक टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर अंतिम कार्यक्रम और भागीदारी से जुड़े औपचारिक निर्णय सामने नहीं आए हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की ओर से भी इस विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बोर्ड से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आईसीसी के निर्देशों के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर खेल और राजनीति के रिश्ते को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश की टीम की भागीदारी पर इन बयानों का कोई व्यावहारिक असर पड़ेगा या नहीं, लेकिन मामला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हलकों में ध्यान खींच रहा है।
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