Last Updated Jun - 05 - 2026, 12:26 PM | Source : Fela News
BCCI’s Big Move: विदेशी लीग खेलने के लिए संन्यास लेने वाले खिलाड़ियों पर जल्द सख्ती हो सकती है। BCCI नई रिटायरमेंट पॉलिसी लाने की तैयारी में है, जिससे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है।
भारतीय क्रिकेट में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. विदेशी टी20 लीग्स में खेलने के लिए समय से पहले संन्यास लेने वाले खिलाड़ियों पर लगाम कसने की तैयारी शुरू हो गई है. बीसीसीआई अब ऐसी नई रिटायरमेंट पॉलिसी पर विचार कर रहा है, जो भारतीय क्रिकेट छोड़कर सीधे विदेशी लीग्स का रुख करने वाले खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है.
विदेशी लीग्स की बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित बीसीसीआई
हाल के वर्षों में कई भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, घरेलू क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास लेकर विदेशी टी20 लीग्स में खेलने लगे हैं. इन लीग्स में मिलने वाले बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स और आकर्षक ऑफर्स ने खिलाड़ियों का रुझान बढ़ाया है. इसी वजह से बीसीसीआई ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और हाल ही में हुई एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा की गई.
क्या हैं मौजूदा नियम?
बीसीसीआई के वर्तमान नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय खिलाड़ी विदेशी टी20 या फ्रेंचाइजी लीग में हिस्सा नहीं ले सकता. चाहे वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहा हो, घरेलू क्रिकेट का हिस्सा हो या आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट में शामिल हो. विदेशी लीग में खेलने की अनुमति केवल उन्हीं खिलाड़ियों को मिलती है जो भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से पूरी तरह संन्यास ले चुके हों.
5 साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड पर विचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीसीसीआई अब एक सख्त कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रहा है. प्रस्तावित नियम के तहत यदि कोई खिलाड़ी संन्यास लेकर सीधे विदेशी लीग्स में खेलने जाता है, तो भारतीय क्रिकेट में वापसी की स्थिति में उस पर कम से कम 5 साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा संदेश
बीसीसीआई का मानना है कि संन्यास सिर्फ विदेशी लीग्स में खेलने का रास्ता नहीं बनना चाहिए. बोर्ड चाहता है कि अनुभवी और प्रतिभाशाली खिलाड़ी ज्यादा समय तक भारतीय क्रिकेट, घरेलू टूर्नामेंट्स और आईपीएल से जुड़े रहें. नई नीति का मकसद खिलाड़ियों को जल्दबाजी में संन्यास लेने से रोकना और भारतीय क्रिकेट की मजबूती बनाए रखना है.
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन बीसीसीआई की मंशा साफ है. विदेशी लीग्स के बढ़ते आकर्षण के बीच भारतीय क्रिकेट के हितों को प्राथमिकता देते हुए बोर्ड जल्द नई रिटायरमेंट पॉलिसी का ऐलान कर सकता है. इससे आने वाले समय में खिलाड़ियों के करियर फैसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
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