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AI का दौर आएगा, पर इन नौकरियों पर नहीं पड़ेगा असर

AI का दौर आएगा, पर इन नौकरियों पर नहीं पड़ेगा असर

Last Updated Feb - 04 - 2026, 06:33 PM | Source : Fela News

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक AI से नौकरियां खत्म नहीं होंगी. हेल्थ, शिक्षा, कंस्ट्रक्शन और क्रिएटिव क्षेत्रों में इंसानी कौशल और संवेदनाएं हमेशा जरूरी बनी
AI का दौर आएगा
AI का दौर आएगा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में एक ही सवाल बार-बार उठता है— क्या मशीनें इंसानों की नौकरियां छीन लेंगी? खासकर युवाओं के बीच यह डर तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने इस चिंता को काफी हद तक कम करने की कोशिश की है. सर्वे में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत जैसे श्रम-प्रधान देश में AI बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म नहीं करेगा, बल्कि कई क्षेत्रों में नए अवसर भी पैदा करेगा. 

सर्वे के अनुसार, अब तक के आंकड़े यह नहीं दिखाते कि AI के कारण रोजगार पर कोई बड़ा संकट आने वाला है. भारत की अर्थव्यवस्था बड़ी संख्या में युवाओं और उनकी स्किल पर टिकी हुई है. ऐसे में AI इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने का काम करेगा. हां, यह जरूर है कि कुछ रूटीन और दोहराए जाने वाले काम ऑटोमेशन की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन इससे रोजगार का बड़ा संकट खड़ा होने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती. 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का सही लाभ उठाने के लिए हर साल करीब 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी. इसके लिए सिर्फ डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्किल डेवलपमेंट, अपस्किलिंग और री-स्किलिंग पर जोर देना होगा. अगर युवा नई तकनीकों को अपनाते हैं और अपने कौशल को अपडेट करते रहते हैं, तो AI उनके लिए खतरा नहीं बल्कि मददगार साबित होगा. 

सर्वे में कुछ ऐसे क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया गया है, जहां AI की भूमिका सीमित रहेगी क्योंकि वहां मानवीय संवेदनाएं, अनुभव और समझ सबसे अहम हैं. हेल्थ और केयर सेक्टर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. बुजुर्गों की देखभाल, नर्सिंग, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग और सामाजिक सेवाओं में इंसानी स्पर्श की जगह कोई मशीन नहीं ले सकती. इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में छोटे बच्चों की पढ़ाई, विशेष जरूरतों वाले छात्रों की ट्रेनिंग और मेंटरिंग जैसे काम पूरी तरह इंसानों पर निर्भर रहेंगे. 

इसके अलावा कई हैंड्स-ऑन तकनीकी काम भी ऐसे हैं, जहां हर स्थिति अलग होती है और मौके के हिसाब से निर्णय लेना पड़ता है. प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क, कंस्ट्रक्शन, रिपेयर और मेंटेनेंस जैसे पेशों में इंसानी समझ और अनुभव की जरूरत होती है. यहां AI पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकता. 

क्रिएटिव क्षेत्रों में भी AI की सीमाएं साफ दिखाई देती हैं. खाना बनाने की कला, हस्तशिल्प, डिजाइन, लेखन, नेतृत्व, नवाचार और AI गवर्नेस जैसे क्षेत्रों में सोचने-समझने और नए विचार पैदा करने की क्षमता सबसे बड़ी ताकत है. मशीनें डेटा के आधार पर सुझाव दे सकती हैं, लेकिन मौलिक सोच और भावनात्मक समझ इंसानों की विशेषता है. 

इकोनॉमिक सर्वे का संदेश साफ है - AI से डरने की जरूरत नहीं है. यह तकनीक काम करने के तरीके को बदलेगी, लेकिन इंसानी भूमिका को खत्म नहीं करेगी. जो लोग समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे, वे इस बदलाव से सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगे. सही स्किल, ट्रेनिंग और सीखने की इच्छा के साथ भारत का युवा वर्ग AI के इस दौर को अवसर में बदल सकता है, न कि खतरे में. 

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