Last Updated Mar - 17 - 2026, 01:04 PM | Source : Fela News
16 मार्च 2026 की देर रात अफगानिस्तान में हालात गंभीर हो गए, जब पाकिस्तानी फाइटर जेट्स द्वारा रिहायशी इलाकों और एक अस्पताल पर बमबारी का आरोप लगा। हालांकि, पाकिस्तान ने इन दावों से इनकार किया है।
Pakistan Air Strike on Afghanistan: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोमवार रात काबुल के एक बड़े ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल पर एयरस्ट्राइक की गई। तालिबान के अनुसार इस हमले में कम से कम 400 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 250 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि धमाका इतना भयंकर था कि आग की ऊंची लपटें कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रही थीं और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है
तालिबान के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने बताया कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 9 बजे हुआ। उनके अनुसार काबुल के 9वें पुलिस जिले में स्थित ‘ओमिद’ नाम के 2,000 बेड वाले नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया गया। हमले के बाद अस्पताल का बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और वहां आग लग गई। राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम कर रही हैं। तालिबान का कहना है कि यह हमला सीधे तौर पर आम नागरिकों को निशाना बनाकर किया गया, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने तालिबान के इन दावों को झूठा और गुमराह करने वाला बताया है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें तकनीकी उपकरण और हथियारों के भंडार शामिल थे। सरकार का कहना है कि यह ठिकाने काबुल और नंगरहार में मौजूद थे और इनका इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि कार्रवाई बेहद सटीक और सावधानीपूर्वक की गई, ताकि किसी भी आम नागरिक को नुकसान न पहुंचे।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा मानी जा रही है। पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल टीटीपी जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। कूटनीतिक स्तर पर कई कोशिशें भी की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम लोगों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है।
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