Last Updated Jan - 24 - 2026, 12:41 PM | Source : Fela News
अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिका ने कथित ड्रग तस्करी के आरोप में नाव पर हमला किया। दो लोगों की मौत हुई। मानवाधिकार संगठनों ने कार्रवाई की वैधता पर सवाल
वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक और घातक हमला किया है। पूर्वी प्रशांत महासागर में शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में एक नाव को निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति जीवित बच गया। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह नाव ड्रग तस्करी में शामिल थी, हालांकि इस दावे को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमेरिकी साउदर्न कमांड (USSOUTHCOM) ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर यह नाव पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मार्ग से गुजर रही थी। कमांड के अनुसार, नाव को "नार्को-आतंकी नेटवर्क" से जुड़ा बताया गया है। हमले के बाद एक संदिग्ध जीवित पाया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति अभी भी लापता है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया है।
यह हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के उस व्यापक सैन्य अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जो सितंबर से कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ चलाया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह अभियान अब तक कम से कम 36 सैन्य हमलों तक पहुंच चुका है, जिनमें कैरिबियन सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र शामिल हैं। इन कार्रवाइयों में अब तक करीब 125 लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य अमेरिका में अवैध ड्रग्स की सप्लाई रोकना और नार्को-आतंकवाद से निपटना है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि अब तक अमेरिका ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किए हैं कि जिन नावों को निशाना बनाया गया, वे वास्तव में ड्रग तस्करी में शामिल थीं। यह कार्रवाई 3 जनवरी को वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई के बाद सामने आई है, जब अमेरिका ने वहां कथित नार्को-नेटवर्क के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था। उस अभियान में वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किए जाने का दावा भी किया गया था। दोनों फिलहाल न्यूयॉर्क की एक संघीय जेल में ड्रग तस्करी के मामलों का सामना कर रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने अमेरिका की इन कार्रवाइयों की तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के की गई ऐसी सैन्य कार्रवाइयाँ "एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग" की श्रेणी में आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह संभावित अपराध के शक में सीधे जानलेवा कार्रवाई करे, खासकर तब जब तत्काल खतरे का कोई स्पष्ट प्रमाण न हो। इसी बीच अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि 11 फरवरी को वॉशिंगटन में 34 देशों के सैन्य प्रमुखों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं पर चर्चा करना और क्षेत्रीय सैन्य सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
अब सवाल यह है कि ड्रग तस्करी रोकने के नाम पर की जा रही ये सैन्य कार्रवाइयाँ क्या वास्तव में वैश्विक सुरक्षा बढ़ा रही हैं, या फिर यह अमेरिका की बढ़ती एकतरफा सैन्य नीति का संकेत हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस अभियान की दिशा और वैधता तय करेगी।
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