Last Updated Oct - 29 - 2025, 06:35 PM | Source : Fela News
तुर्की वार्ता नाकाम — तालिबान भड़का पाकिस्तान पर, अफगान-PAK रिश्तों में बढ़ा तनाव।
तुर्की में हुई अफगान-PAK शांति वार्ता नतीजा देने से पहले ही बिखर गई। अब तालिबान का गुस्सा पाकिस्तान पर फूट पड़ा है। सवाल उठ रहा है—क्या ये सिर्फ नाराज़गी है या दोनों के बीच कोई गहरा अविश्वास पनप चुका है।
तुर्की के इस्तांबुल में अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। यह बातचीत अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ किसी समझौते की उम्मीद के साथ शुरू हुई थी, लेकिन अब यह वार्ता तनाव में बदल गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने वार्ता के दौरान तालिबान सरकार पर दबाव डाला कि वे TTP के ठिकानों पर कार्रवाई करें, लेकिन काबुल सरकार ने इसे सख्ती से ठुकरा दिया। इसके बाद बातचीत का माहौल इतना बिगड़ा कि अफगान प्रतिनिधि अचानक बैठक छोड़कर चले गए। कहा जा रहा है कि इस्लामाबाद से आए फोन कॉल्स और वहां के अधिकारियों की “धमकी भरी भाषा” ने तालिबान को और भड़का दिया।
तालिबान के सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI ने अफगानिस्तान के भीतर घुसकर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसी बात ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया। तालिबान नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान की संप्रभुता में हस्तक्षेप कर रहा है और “दोस्ती” के नाम पर नियंत्रण चाहता है।
काबुल से मिली जानकारी के अनुसार, तालिबान ने साफ कहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन पाकिस्तान को भी अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि TTP उसके नागरिकों और सुरक्षाबलों पर हमले कर रही है, इसलिए वह कार्रवाई करने के लिए मजबूर है।
दोनों देशों के बीच यह तनातनी नई नहीं है। 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद से ही पाकिस्तान लगातार सीमापार हमलों को लेकर शिकायत करता आ रहा है। अब तुर्की में हुई यह असफल बैठक दोनों के रिश्तों में एक और दरार जोड़ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें “सीमा नियंत्रण, प्रभाव और राजनीतिक भरोसे” की लड़ाई भी शामिल है। फिलहाल, अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों अपने-अपने रुख पर अड़े हैं और इस जिद के बीच दक्षिण एशिया की शांति एक बार फिर अधर में लटक गई है।