Last Updated Dec - 19 - 2025, 05:26 PM | Source : Fela News
बांग्लादेश में छात्र नेता की मौत के बाद हिंसा भड़की, ढाका समेत कई शहरों में आगजनी, प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता गहराई।
बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंसा और तनाव चरम पर पहुँच गया है। राजधानी ढाका और अन्य शहरों की सड़कों पर प्रदर्शनकारी, आगजनी और राजनीतिक टकराव का मंजर दिख रहा है, जिससे देश की स्थिति बेहद नाज़ुक हो गयी है।
बड़ी हिंसा उस समय शुरू हुई जब छात्र-नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैली। उन्हें पिछले हफ्ते ढाका में एक नकाबपोश हमलावर ने गोली मारी थी, और वे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान अपने गंभीर घावों के चलते मृत हो गये। उसी खबर के फैलते ही सड़कों पर भारी आक्रोश फैल गया।
प्रदर्शनकारियों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर नारेबाज़ी की और कई जगहों पर तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएँ हुईं। ढाका में देश की प्रमुख समाचार पत्र ‘Prothom Alo’ और ‘The Daily Star’ के ऑफिसों को आग के हवाले कर दिया गया, इमारतों में फंसे पत्रकारों को बचाने के प्रयास किए गए।
सड़कों पर प्रदर्शनकारी कई और स्थानों पर भी टूट पड़े। राजशाही में अवामी लीग पार्टी के दफ्तरों में आग लगी, भारत के उप-उच्चायोग के घर के पास पत्थरबाजी भी हुई, और चटगांव समेत अन्य शहरों में भी हिंसा की खबरें आईं। पुलिस ने आक्रोश फैलने को रोकने के लिए अश्रु-गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया।
यह भी बताया गया कि कुछ विरोध प्रदर्शन हिंदू समुदाय के खिलाफ भी हिंसक रूप ले चुके हैं, जिनमें एक युवक को भीड़ ने पीटकर मार डाला और बाद में शव को आग लगायी गयी बतायी गयी है।
इन घटनाओं ने न केवल राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा दी है बल्कि मीडिया की आज़ादी और नागरिक सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की मौजूदा अस्थिर स्थिति में सरकार और सुरक्षा बलों के लिए नियंत्रण बनाए रखना कठिन होता जा रहा है, और भविष्य में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जतायी जा रही है।
बांग्लादेश में यह हिंसा दिखाती है कि अगर राजनीतिक तनाव, असंतोष और नेतृत्व के बीच गहरी दरार बनी रहे, तो सामान्य जीवन पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है, और देश की व्यवस्था कितनी जल्दी आग और पत्थरों से भर सकती है।
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