Last Updated Feb - 10 - 2026, 03:21 PM | Source : Fela news
बांग्लादेश के प्रमुख दलों ने चुनावी घोषणापत्र में किसान, महिला, शिक्षा और कल्याण योजनाओं पर जोर दिया है, जिनमें कई प्रस्ताव भारतीय मॉडल से मिलते बताए जा रहे हैं
बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के घोषणापत्र सामने आने लगे हैं, जिनमें सामाजिक कल्याण, किसान सहायता, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं पर विशेष फोकस दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रस्ताव ऐसे हैं जिनकी तुलना भारत में पहले से लागू योजनाओं से की जा रही है।
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपने घोषणापत्र में परिवार आधारित कार्ड व्यवस्था लागू करने का वादा किया है, जिसे महिला मुखिया के नाम पर जारी करने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव भारत में चल रही परिवार और राशन कार्ड आधारित कल्याण योजनाओं से मिलता-जुलता माना जा रहा है। इसके साथ ही महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
वहीं शिक्षा क्षेत्र में मुफ्त पढ़ाई और छात्र सहायता कार्यक्रमों जैसे वादे भी शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह ढांचा भारत की छात्रवृत्ति और शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं से प्रभावित बताया जा रहा है। इस बीच स्कूली पोषण और मिड-डे मील जैसे कार्यक्रमों के विस्तार की बात भी घोषणापत्रों में सामने आई है, जिसका उद्देश्य बच्चों की उपस्थिति और पोषण स्तर सुधारना बताया गया है।
दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी और अन्य दलों ने भी सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी है। प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे में युवाओं को प्रशिक्षण देने, रोजगार अवसर बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने जैसे वादे शामिल किए गए हैं। बताया जा रहा है कि कौशल विकास से जुड़े कई प्रस्ताव भारत में चल रहे स्किल मिशन मॉडल से प्रेरित माने जा रहे हैं।
इस बीच महिला कल्याण, स्वास्थ्य सुरक्षा और ग्रामीण सहायता योजनाओं को भी चुनावी बहस के केंद्र में रखा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सामाजिक योजनाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति पर सभी प्रमुख दल काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर बांग्लादेश का चुनावी विमर्श इस बार कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक केंद्रित दिखाई दे रहा है, जहां विभिन्न दल मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए व्यापक सामाजिक व आर्थिक वादे पेश कर रहे हैं, जिनमें कई प्रस्ताव भारतीय नीतिगत मॉडलों से मेल खाते बताए जा रहे हैं।
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