Last Updated Jun - 20 - 2025, 10:46 AM | Source : Fela News
विश्व स्तर पर प्रतिबंध होने के बावजूद जापान और नॉर्वे अब भी वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए व्हेल का शिकार कर रहे हैं, जबकि समुद्री जीवन को लेकर चिंता और व्हेल मांस
जापान ने हाल ही में पृथ्वी के दूसरे सबसे बड़े जीव फिन व्हेल के शिकार की योजना की घोषणा की है। इसके लिए उसने 9,000 टन वजनी नया शिकार जहाज़ ‘कांगेई मारू’ भी लॉन्च किया है। जापान 2019 में इंटरनेशनल व्हेलिंग कमीशन (IWC) से बाहर हो गया था और इसके बाद से वाणिज्यिक व्हेलिंग फिर शुरू कर दी। 1986 के वैश्विक प्रतिबंध के बाद से जापान करीब 20,000 व्हेल का शिकार कर चुका है, जिनमें कुछ संकटग्रस्त प्रजातियां जैसे मिंके, ब्राइड और सेई व्हेल भी शामिल हैं।
फिन व्हेल को 1976 से संरक्षित प्रजातियों की सूची में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनका शिकार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इन्हें पहले से ही जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, मछली पकड़ने के जाल और जहाजों से टकराव जैसे खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, नॉर्वे में व्हेल मांस की मांग अब तक के सबसे निचले स्तर पर है, लेकिन परंपरा के नाम पर शिकार अभी भी जारी है। पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि व्हेल का मानवीय रूप से शिकार करना असंभव है, जिससे यह अभ्यास न केवल अनावश्यक बल्कि क्रूर भी बन जाता है।
विशेषज्ञ अब दोनों देशों से अपील कर रहे हैं कि वे वाणिज्यिक व्हेलिंग को बंद कर, व्हेल वॉचिंग टूरिज्म जैसे विकल्पों में निवेश करें, जो न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है बल्कि समुद्री जीवन को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। व्हेलों को बचाना समुद्रों को स्वस्थ रखने और कार्बन कैप्चर के ज़रिए जलवायु संकट से लड़ने में भी मदद करता है।