Last Updated Nov - 01 - 2025, 11:11 AM | Source : Fela News
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया को ईसाइयों के लिए खतरा बताया है और उसे ‘स्पेशल वॉच लिस्ट’ में शामिल कर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नाइजीरिया में ईसाइयों पर हिंसा लगातार बढ़ रही है और उनका अस्तित्व खतरे में है. उन्होंने नाइजीरिया को अमेरिकी विदेश विभाग की स्पेशल वॉचलिस्ट में शामिल करने की घोषणा की है. ट्रंप ने अपने Truth Social पोस्ट में लिखा कि “हज़ारों ईसाई मारे जा रहे हैं, और कट्टरपंथी ताकतें उनके खिलाफ नरसंहार कर रही हैं. अब अमेरिका कार्रवाई शुरू कर रहा है.”
अब नाइजीरिया को Countries of Particular Concern (CPC) की सूची में डाल दिया गया है. इस लिस्ट में पहले से चीन, रूस, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और म्यांमार जैसे देश शामिल हैं. इस श्रेणी में शामिल देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन माना जाता है. इसका मतलब तुरंत आर्थिक प्रतिबंध नहीं, लेकिन अमेरिका भविष्य में ऐसा कदम उठा सकता है.
ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों से मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा, “जब हजारों लोग सिर्फ अपने धर्म की वजह से मारे जा रहे हों, तो दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए. अब ठोस कार्रवाई का वक्त है.”
वहीं, नाइजीरिया सरकार ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार किसी धर्म के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा नहीं देती. रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया को पहले भी 2020 में इस सूची में शामिल किया गया था, लेकिन 2023 में हटा दिया गया था. अब ट्रंप प्रशासन ने इसे दोबारा जोड़ा है.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले साल नाइजीरिया में 4,000 से ज्यादा ईसाई मारे गए और करीब 2,000 चर्चों पर हमले हुए. इन घटनाओं के पीछे बोको हराम और फुलानी मिलिशिया जैसे आतंकी समूहों का हाथ बताया जा रहा है.
अमेरिकी कानून के तहत, किसी देश को विशेष चिंता वाला देश तब घोषित किया जाता है जब वहां धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर हनन हो. ऐसे देशों पर अमेरिका व्यापारिक या आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है.
अब ट्रंप प्रशासन नाइजीरिया की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगा और भविष्य में संभावित आर्थिक या कूटनीतिक कदमों पर फैसला लेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अफ्रीका में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका की नीति का हिस्सा है, जिसमें ट्रंप प्रशासन ईसाइयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है.