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हमास ने मानी अमेरिका की बात, ग़ज़ा में 70 दिन के संघर्षविराम की उम्मीद जगी

हमास ने मानी अमेरिका की बात, ग़ज़ा में 70 दिन के संघर्षविराम की उम्मीद जगी

Last Updated May - 27 - 2025, 03:23 PM | Source : Fela News

ग़ज़ा युद्ध पर बड़ा मोड़, हमास ने अमेरिकी प्रस्ताव पर जताई सहमति। अब 70 दिन के संघर्षविराम और राहत कार्यों की उम्मीद बढ़ी। तनाव घटने की आस।
हमास ने मानी अमेरिका की बात
हमास ने मानी अमेरिका की बात

 

ग़ज़ा में जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। हमास ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ द्वारा प्रस्तुत किए गए संघर्षविराम प्रस्ताव पर सहमति जताई है। रॉयटर्स को एक फलस्तीनी अधिकारी ने बताया कि यह प्रस्ताव हमास को मध्यस्थों के ज़रिए सौंपा गया था, जिसमें 70 दिनों के संघर्षविराम और 10 बंधकों की रिहाई की बात शामिल है।

इस सहमति के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ग़ज़ा में पिछले कई महीनों से जारी विनाशकारी युद्ध पर कुछ समय के लिए विराम लग सकता है।

संघर्षविराम का खाका क्या है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में यह तय किया गया है कि हमास 10 बंधकों को रिहा करेगा और उसके बदले इज़राइल 70 दिनों के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। इस दौरान मानवीय सहायता ग़ज़ा में पहुंचाई जाएगी और संघर्ष की शांति से समाधान के लिए मध्यस्थों की निगरानी में बातचीत आगे बढ़ेगी।

हमास की प्रतिक्रिया

हमास से जुड़े अधिकारी ने बताया कि समूह ने इस प्रस्ताव को "सकारात्मक दिशा में बढ़ने वाला कदम" बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर विचार करने और अमल में लाने के लिए हमास तैयार है, बशर्ते इज़राइल भी अपनी ओर से गंभीरता दिखाए।

अमेरिका की भूमिका

यह प्रस्ताव अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ द्वारा तैयार किया गया है, जो इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को खत्म करने के लिए पिछले कुछ हफ्तों से कतर, मिस्र और अन्य मध्यस्थ देशों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं।

इज़राइल की प्रतिक्रिया का इंतज़ार

हालांकि अभी तक इज़राइली सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि अगर बंधकों की सुरक्षित रिहाई की गारंटी मिलती है तो इज़राइल भी अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हो सकता है।

मानवता के लिए राहत की उम्मीद

ग़ज़ा में जारी इस युद्ध ने अब तक हज़ारों बेगुनाह लोगों की जान ली है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। बिजली, पानी, दवाइयों और खाने की भारी किल्लत ने मानवीय संकट को और बढ़ा दिया है। ऐसे में यह प्रस्ताव सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय राहत की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है और दोनों पक्ष इसे स्वीकार करते हैं, तो यह ग़ज़ा के नागरिकों के लिए कुछ राहत की सांस ला सकता है। साथ ही, यह एक बड़ी उम्मीद बन सकता है कि शायद आने वाले दिनों में स्थायी शांति की दिशा में भी कोई ठोस पहल हो सके। फिलहाल दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि इज़राइल की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या 70 दिन की यह शांति, एक स्थायी समाधान की शुरुआत बन सकती है।

 

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