Last Updated Jan - 29 - 2026, 03:15 PM | Source : Fela News
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित FTA को ऑटो सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि इससे आयात शुल्क, प्रतिस्पर्धा और निवेश के समीक
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस समझौते के लागू होने पर भारत के कार और टू-व्हीलर बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस जैसे प्रमुख ऑटो निर्माताओं ने इस डील को अवसर और चुनौती दोनों के रूप में देखा है।
सूत्रों के अनुसार भारत-EU FTA के तहत ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स पर लगने वाले आयात शुल्क में चरणबद्ध कटौती की जा सकती है। इससे यूरोप से आने वाली कारें और बाइक भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इससे घरेलू कंपनियों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ेगा।
इस बीच टाटा मोटर्स के अधिकारियों का कहना है कि FTA से भारत के ऑटो सेक्टर को नई तकनीक और बेहतर सप्लाई चेन का लाभ मिल सकता है। उनका मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में यूरोपीय कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि सरकार घरेलू उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए ही किसी समझौते को अंतिम रूप देगी।
वहीं दूसरी ओर हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस मोटर कंपनी जैसे टू-व्हीलर निर्माता भी इस डील को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार सस्ते आयात से प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में प्रवेश का रास्ता भी मिल सकता है। निर्यात बढ़ने से उत्पादन और रोजगार पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि ऑटो कंपोनेंट सेक्टर भी इस FTA से प्रभावित होगा। यूरोप से उच्च गुणवत्ता वाले कंपोनेंट्स सस्ते दामों पर उपलब्ध होने से लागत घट सकती है, लेकिन घरेलू छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए चुनौती भी पैदा हो सकती है। इसको लेकर उद्योग जगत सरकार से सुरक्षा उपायों और चरणबद्ध कार्यान्वयन की मांग कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-EU FTA का असर केवल कारों की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ऑटो वैल्यू चेन पर पड़ेगा। फिलहाल बातचीत जारी है और अंतिम शर्तें तय होना बाकी हैं। हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि अगर यह समझौता लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का ऑटो बाजार पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी और वैश्विक हो सकता है।
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