Last Updated Jan - 29 - 2026, 12:29 PM | Source : Fela News
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बीच मुंबई में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और भारत के डिप्टी NSA की मुलाकात हुई, परमाणु वार्ता और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में भारत में हुई एक अहम कूटनीतिक मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय हलकों का ध्यान खींचा है। मुंबई में भारत के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर entity["people", "पवन कपूर", "india deputy nsa"] और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी entity["people","अली लारीजानी","iran security official"] के बीच बैठक हुई। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब अमेरिका और ईरान के रिश्ते फिर से टकराव के कगार पर नजर आ रहे हैं।
ईरान के मुंबई स्थित कॉन्सुलेट जनरल ने इस बैठक की पुष्टि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। पोस्ट में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। हालांकि बातचीत के विस्तृत एजेंडे को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और परमाणु वार्ता जैसे संवेदनशील विषय शामिल रहे होंगे।
यह बैठक उस वक्त हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति entity["people", "डोनाल्ड ट्रंप", "us president" ] ने ईरान को कड़ी चेतावनियां दी हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि अमेरिका ने एक और बड़ा नौसैनिक बेड़ा मध्य पूर्व की ओर भेजा है, जो पहले से भेजे गए बेड़े से भी ज्यादा शक्तिशाली है। उनका कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका तेजी और सख्ती से कार्रवाई करने में सक्षम है।
ट्रंप ने ईरान से अपील की है कि वह रुकी हुई परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करे और एक “निष्पक्ष और न्यायसंगत” समझौते के लिए बातचीत की मेज पर लौटे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समय तेजी से निकल रहा है और हालात गंभीर होते जा रहे हैं। ट्रंप ने यह भी इशारा किया कि अगर बातचीत नहीं हुई, तो टकराव की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिकी चेतावनियों के जवाब में सख्त रुख अपनाया है। तेहरान की ओर से कहा गया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ईरान पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह दबाव की राजनीति के तहत कोई समझौता नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता से समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता।
ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और अमेरिका तथा ईरान दोनों के साथ उसके रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं। ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति भारत की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत की उस कोशिश का हिस्सा हो सकती है, जिसमें वह संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की भूमिका निभाना चाहता है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान रिश्तों की दिशा क्या होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन मुंबई में हुई यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए है
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