Last Updated Oct - 09 - 2025, 04:51 PM | Source : Fela News
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्लान से जुड़ी एक राहत भरी खबर आई है। कुछ भारतीय जेनेरिक दवाएं 100% टैरिफ से बाहर रखी जा सकती हैं, जिससे फार्मा सेक्टर में
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा चुनावी दावेदार डोनाल्ड ट्रंप के 100% टैरिफ प्लान को लेकर भारतीय फार्मा सेक्टर में बेचैनी थी। लेकिन अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने अपने प्रस्तावित टैरिफ प्लान से कुछ जेनेरिक दवाओं को बाहर रखने पर विचार किया है। इसका मतलब है कि भारतीय दवा कंपनियों को फिलहाल इस फैसले से नुकसान नहीं होगा।
दरअसल, ट्रंप की 100% टैरिफ नीति का उद्देश्य विदेशी उत्पादों, खासकर चीन और भारत से आने वाले सामानों पर भारी शुल्क लगाना था। लेकिन अमेरिकी सरकार को भी यह एहसास है कि दवाओं पर ज्यादा टैरिफ लगाने से घरेलू बाजार में दवा की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम जनता पर बोझ पड़ेगा। इसी वजह से अब कुछ फार्मास्युटिकल उत्पादों को इस लिस्ट से बाहर रखने की चर्चा है।
भारतीय कंपनियों के लिए यह खबर किसी राहत से कम नहीं है। अमेरिका, भारत की जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है। अगर टैरिफ लागू होता, तो भारत की दवा एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता था। लेकिन अब इस बदलाव की संभावना के बाद भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर के स्टॉक्स में तेजी देखी जा रही है। सन फार्मा, डॉ. रेड्डी और सिप्ला जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में उछाल दर्ज हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने वाकई जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से बाहर रखा, तो इससे न सिर्फ भारतीय कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी सस्ती दवाएं मिलती रहेंगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी।
हालांकि अभी अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन संकेत सकारात्मक हैं। भारतीय निवेशक और दवा निर्माता उम्मीद कर रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक नई राहत साबित होगा। फिलहाल बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में भारतीय फार्मा कंपनियों की किस्मत अमेरिका की नीति से फिर बदल सकती है।