Last Updated Jun - 02 - 2025, 02:06 PM | Source : Fela News
काठमांडू में राजशाही की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा हिरासत में लिए गए और हालात बिगड़ने पर शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी ग
नेपाल में राजशाही की बहाली की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों के चौथे दिन, 1 जून 2025 को, काठमांडू में पुलिस ने राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा उन्हें सड़क पर घसीटते हुए ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया है।
29 मई से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं, जो नेपाल को फिर से हिंदू राजतंत्र बनाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में नारे लगाए और वर्तमान सरकार को भ्रष्ट बताते हुए उसके खिलाफ विरोध जताया।
पिछले सप्ताह, 28 मार्च को, काठमांडू के टिंकुने क्षेत्र में हुए एक बड़े प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लागू किया था।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद में घोषणा की है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर भी हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
विपक्षी दलों ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र लिंगदेन ने संसद में कहा कि सरकार जनता की भावनाओं को दबा रही है और चेतावनी दी कि यदि जनता चाहेगी तो गणतंत्र को पलटकर फिर से राजतंत्र स्थापित किया जा सकता है
वर्तमान में, काठमांडू में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने कई क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई
नेपाल में यह आंदोलन एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या देश की जनता वर्तमान गणतंत्र से संतुष्ट है या फिर वे पुराने राजतंत्र की ओर लौटना चाहती है।